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Sunday, July 8, 2018

नेटवर्क मार्केटिंग में आने वाले महत्‍वपूर्ण सवालों का आसान जवाब !




यह मानवीय प्रवृति है कि जब भी हम कोई चीज देखते है तो हमारा मन उस विषय को लेकर तर्क-वितर्क करने लगता है जिसके दौरान बहुत सारे सवाल खड़े हो जाते हैं। जाहिर है यह बिजनेस देखने के बाद आपके मन में भी बहुत सारे सवाल आ चुके होंगे। पेश है- मुख्ये सवालों पर एक नजर:-




1.डायरेक्‍ट सेलिंग बिजनेस क्‍या है ? और इसके क्‍या-क्‍या लाभ है ?

आज ज्‍यादात्‍तर कम्‍पनियां अपने उपभेक्‍ताओं से सीधा सम्‍पर्क बनाना चाहती है, जिससे उनको और उनके उपभोक्‍ताओं को ज्‍यादा से ज्‍यादा लाभ मिल सके क्‍योंकि बीच में जितने माध्‍यम ज्‍यादा होंगे लाभ उतना ही कम होगा उदाहरण के तौर पर :- कम्‍पनी, स्‍टॉकिस्‍ट, एजेन्‍ट्स डिस्ट्रिब्‍यूटर्स, होलसेलर्स, रिटेलर्स आदि ।
अब लाभ की बात करें तो इसका प्रशिक्षण आपके  व्‍यक्तिगत विकास में सहायक होता है तथा अपके भीतर आत्‍म-विश्‍वास पैदा करता है और आपकी सोच को एक नई दिशा देता है, जिससे आप आम आदमी से खास आदमी बन सकते है।
इन सभी के साथ–साथ आपको मिलती है आर्थिक आजादी, समय की स्‍वतन्‍त्रता, खुशहाली भरा जीवन और अपनी पीढ़ियों की सुरक्षा।

2. डायरेक्‍ट सेलिंग को लेकर लोगों की सोच भिन्‍न भिन्‍न है, ऐसा क्‍यों?

जी हाँ, डायरेक्‍ट सेलिंग के  बारे में भिन्‍न-भिन्‍न विचार हैं। इसका कारण है कि उन लागों ने डायरेक्‍ट सेलिंग के बारे में ठीक से अध्‍ययन ही नहीं किया और न ही ठीक से समझा। क्‍योंकि अधूरा ज्ञान ही असफलता  का कारण है। जैसा कि आपने महाभारत में देखा होगा कि अभिमन्‍यु के पास चक्रव्‍यूह तोड़ने का अधूरा ज्ञान था। और आप परिणाम जानते है। उसे असफलता के रूप में मृत्‍यु हाथ लगीं आइये इसे थोड़ा और स्‍पष्‍ट करते है। अगर अंधेरे में आपके हाथ में सांप की पूछँ आ जाए, तो आप उसे रस्‍सी समझ सकते है। अगर आपके हाथ में एक गोलाकार
फल दिया जाय तो आप उसे गेंद समझ सकते है। यदि आपके प्‍लेट मे आपको कैचुएँ परोस दिये जाय तो आप उसे चाऊमिन समझ सकते है। यदि आपके हाथ में हाथी का पैर आ जाए
, तो आप उसे वृक्ष समझ सकते है। इस प्रकार आप वास्‍तविकता से बहुत दूर हो जाते है। ठीक इसी तरह डायरेक्‍ट सेलिंग को लेकर लोगों के भिन्‍न-भिन्‍न  विचार है। किसी को लगता है कि यह कोई मेम्‍बर बनाने की स्‍कीम है। किसी को लगता है कोई  प्रॉडक्‍ट बेचने का काम है, किसी  को लगता है कि पैसा  ठगने  का काम है, किसी को कुछ तो किसी को कुछ लगता है।

3. लोग कहते हैं कि यह दूसरों को बेवकूफ बनाने एवं धोखा देने का काम है। कृप्‍या स्‍पष्‍ट करें ।

बिल्‍कुल नहीं। यह काम दूसरों को बेवकूफ बनाने के लिए नहीं है बल्कि उन्‍हें स्‍मार्ट एवं समझदार  बनाने के लिए है, अपनी  जिन्‍दगी अपने शर्तों  पर जीने के लिए है तथा अपने एक अलग पहचान बनाने के लिए है। इस काम को करने के बाद आपकों मिल सकती है। समय की स्‍वतन्‍त्रता, आर्थिक आजादी, अपने परिवार की सुरक्षा एवं खुशहाल जीवन। जहाँ तक धोखे का सवाल है, तो बहुत सारी कम्‍पनियाँ इस तरह का काम कर चुकी है। जिससे लोगों का विश्‍वास उठ गया है। परन्‍तु फ्रॉड वही कम्‍पनी करती है जो गैर कानूनी है जिसके पास कोई  प्रोडक्‍ट्स नही होते है। इस तरह की कम्‍पनियाँ केवल धन इकट्ठा करती है इनके फर्जी होने को सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वे केवल चेन बनाती हैं। कमीशन का मोटा लालच देती है और लोग कंपनी की बिना छानबीन किये जुड़ जाते है, और इस तरह की कम्‍पनियों का कार्यकाल 1 साल, 2 साल  या ज्‍यादा से ज्‍यादा 3  साल का होता है। लेकिन डायरेक्‍ट  सेलिंग बिजनेस 1959 से शुरू  होकर आजतक 100 से ज्‍यादा देशों में  चल रहा है। इस प्रकार यह दुनिया का सबसे सरल एवं सबसे खूबसूरत बिजनेस है। इसमें फ्रॉड या चीटिंग जैसी कोई बात नहीं है। क्‍योंकि यहाँ आप जितने पैसे देते है। कम्‍पनी उतनी  कीमत का सामान आपकों तुरंत दे देती है। भाग्‍यशाली समझिए कि आपकों सीखने का पुन: एक अवसर प्रदान हो रहा है, जहाँ  पर आप बहुत सारे पढ़े–लिखे लोगों से मिलकर  वह सारे गुण सीख जाऐंगे जो एक पढ़े–लिखे व्‍यक्ति  में होता है। क्‍योंकि यह सच है कि चन्‍दन के वृक्ष के आस-पास जो वृक्ष होते हैं उनमें भी चन्‍दन के गुण आ जाते हैं।

4. कम्‍पनी  इतना पैसा कहाँ से देती हैं ?

डायरेक्‍ट सेलिंग कंपनियाँ  पैसा अपने घर से नहीं देती जब कम्‍पनी के प्रॉडक्‍ट्स बिकते हैं, कम्‍पनी  तभी पैसा देती है। आईए  इसे समझे । किसी भी बिजनेस में लाभ लेने वाले लोगों की संख्‍या जितनी ज्‍यादा होगी, जाहिर है लाभ का प्रतिशत उतना ही कम होगा। जैसे साधारण बिजनेस में – कम्‍पनी, स्टॉकिस्‍ट, एजेन्‍ट्स, डिट्रिब्‍यूटर्स, होलसेलर्स, रिटेलर्स एवं विज्ञापन  आदि के लिए जो पैसा खर्च होता है। वही बचा हुआ पैसा कम्‍पनी  सीधे अपने उपभेक्‍ताओं को कमीशन के रूप में दे देती है, जिससे आम के आम गुठलियों के भी दाम मिल जाते हैं।



5. इस बिजनेस में पैसा बहुत है लेकिन पैसा भगवान तो नहीं है जो सुख-शांति प्रदान करें सकें ।

दोस्‍तों, किसी ने खूब  कहा कि पैसा भगवान तो नहीं है लेकिन भगवान से कम भी नहीं है। इस सच्‍चाई को नकारा नहीं जा सकता। सोचकर देखिए ईश्‍वर न करे कि आप का बच्‍च किसी अस्‍पताल में अंतिम सांसे ले रहा हो और डाक्‍टर आप से 1 लाख रूपये की मांग कर रहा हो। उस वक्‍त पैसे को लेकर आप पर क्‍या बीत रही होगी, यह उस परिस्थिति से गुजरने पर ही पता चल पायेगा कि इस भौतिक युग में पैसे की उपयोगिता क्‍या है ? पैसा सुख–शांति  के लिए कितना जरूरी है। वैसे पैसा अपने आप में पानी की तरह है अगर शराब में मिलाओं तो  शराब जैसा और अमृत में मिलाओ तो अमृत  हो जाता है। पैसा अपने आप में अच्‍छा या बुरा  नहीं होता है, यह तो साधन है। आप जैसा चाहे वैसे उपयोग कर सकते है। लेकिन यह बात तो पक्‍की है। अगर कुछ भी अच्‍छा काम करना है तो पैसा जरूर  लगेगा क्‍योंकि यह एक साधन है।

6. यह बिजनेस एक चेन सिस्‍टम लगता है। इसलिए ऊपर वाले लोग नीचे वाले लोगों  से काम करवाते है। यानि परिश्रम नीचे वाले करते हैं और फल ऊपर वाले खाते हैं । क्‍या यह  सच नहीं है ?

जी नहीं , बिल्‍कुल नहीं। यह बिजनेस कोई चेन सिस्‍टम नहीं है। और ना ही नीचे  वाले सिर्फ  ऊपर वालों के लिए ही काम करते है। बल्कि यहां पर सभी एक दूसरे का सहयोग करते हुए अपनी–अपनी मंजिल को हासिल  करते है। और इस प्रकार आप अपने सीनियर से मार्ग दर्शन लेकिर अपने बिजनेस को बहुत तेजी से बढ़ा सकते है एक सच्‍च और भी है इस बिजनेस में आपका सिनियर आपकी सहायता करने के लिए मजबूर है क्‍योंकि यदि उसे अपनी आमदनी  बढ़वानी है तो उसे आपकी भी आमदनी बढ़ावानी होगी। इसलिए आप इस बात को अपने दिमाग से निकाल दीजिए कि ऊपर  वाले भी  नीचे वालों के लिए काम करते हैं और उन्‍हें इस बिजनेस के तौर–तरीके  सिखाते हैं।
उदाहरण  के तौर पर अगर सारे सीनियर  काम करना बंद कर दें और सिखाना बंद कर दें तो क्‍या लगता है केवल नये लोग बिना सीखे इस काम को कर सकेंगे ? शायद नहीं। इसीलिए  हम कह सकते हैं कि इस बिजनेस में अप लाईन लीडर्स का बहुत  बड़ा रोल है। जैसे-  घर के बुजुर्ग बस साथ खड़े रहें तो हम सुरक्षित महसूस  करते  हैं।

7. सुना है कि जो पहले ज्‍वाइन कर गया, वह ज्‍यादा कमाता है। बाद में ज्‍वाइन करने वाला कम कमाता है। स्‍पष्‍ट करें ?  
   
ऐसा बिल्‍कुल नहीं है। दोस्‍तों, यह बिजनेस कोई चेन या पिरामिड सिस्‍टम या मेम्‍बर बनाने वाली स्‍कीम नहीं है। इसलिए  आप इसकी चिंता ना करें कि पहले ज्‍वाइन करने वाला ही ज्‍यादा पैसा कमाता है और बाद में ज्‍वाइन करने वाला कम। आप अपने सीनियर्स से भी ज्‍यादा पैसा कमा सकते हैं। ऐसे उदाहरण इस बिजनेस में बहुत हैं। बहुत से लोगों ने अपनी अपलाइन से ज्‍यादा पैसा कमाया है। इसके लिए आपकों निरनतर प्रयास और लगन से सिस्‍टम का अनुसरण करना होगा। और आप यह भी निर्धरित करें कि आपको कितनी कमाई चाहिए और उसी  हिसाब से योजनाबद्ध  तरीके  से काम कीजिए और अपार धन एवं मान सम्‍मान प्राप्‍त कीजिए।

8. यह बिजनेस लोगों को समझाने का काम है, जबकि मुझे ठीक तरह बोलना भी नहीं आता। क्‍योंकि मैं बहुत ही कम पढ़ा लिखा व्‍यक्ति हूँ । क्‍या मैं भी इस बिजनेस को कर सकता हूँ ?  

जी हाँ । यह बिजनेस– लोगों को समझाने  का काम  है। और मान लिया कि आपको  समझाना  नहीं आता। लेकिन आप अपने अपलाइन से मदद तो ले सकते हैं। और इस प्रकार धीरे–धीरे आप भी समझाने लग जायेंगे। क्‍योंकि रहीम दास जी ने कहा कि –
करत करत अभ्‍यास  के जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत – आवत जात ते सिल पर पड़त निशान।।
अब रहा सवाल कम पढ़े–लिखे का तो दोस्‍त, आप अपने आपको बहुत ही छोटा समझ रहें हैं, विवेक शुन्‍य होना और कम पढ़े – लिखे होने में फर्क है। और बार बार पढ़ते रहने से पढ़ना तो सीख ही सकते हैं। फिर डर कैसा।

9. मैं  यह बिजनेस करना तो चाहता हूँ, लेकिन मेरे पास समय नहीं है। क्‍या फिर भी मै, इसे कर सकता हूँ ?

समय तो सबके  पास उतना ही है दोस्‍तों ! पर समय का मैनेजमेन्‍ट सबको नहीं आता, जिसको यह कला जितनी ज्‍यादा आती है, वह उतना ही सफल हो जाता है। हर कामयाब आदमी, जिसने जीवन में बड़ी–बड़ी उपलब्धियॉं  हासिल  की है, उनके पास भी दिन-रात मिलाकर 24 घंटे ही थे। जो लोग कामयाब हुए हैं, आपकी तरह वे भी सामाजिक और घर परिवार वाले लोग ही थे और जिम्‍मेदारियाँ निभाते हुए उन्‍होंने सफलता हासिल की। फिर आप समय का रोना क्‍यों रोते हैं ? आप अकेले 10-12 या 14 घंटे काम कर सकते हैं। जरा सोचिए  क्‍या यह अमीरी का रास्‍ता है या यूँ  सोचिए कि जो लोग अमीर हैं क्‍या वह लोग 12 या 14 घंटे ही काम करते हैं ? नहीं ! वह लोग हजारों घंटे काम करते हैं। अब  सोच रहे होंगे कि एक दिन में 24 घंटे ही होते हैं तो हजारों  घंटे  कैसे ? क्‍योंकि उनके लिए हजारों लोग काम करते हैं।  इसे ही स्‍मार्ट  वर्क कहते हैं। वहीं अवसर आपके पास है। आप अपने काम के ढंग  में थोड़ा बदलाव लाइए। जिस काम में समय अधिक बर्बाद होता है प्राप्ति कुछ भी नहीं होती या होती है तो न के बराबर, उस काम को नमस्‍ते  कहकर इस बिजनेस में आइए, अपनी मेहनत और प्रयास तथा हमारी सहायता से उस मुकाम को हासिल कीजिए, जिससे आप अपने जीवन और परिवार को खुशहाल बना सकें। एक बार अवश्‍य सोचिए कि वर्तमान समय में आप जो भी काम कर रहें हैं, उस काम को करते हुए क्‍या आपको समय की स्‍वतन्‍त्रता, लाखों रूपये महीने में कमाने का अवसर प्राप्‍त हो पायेगा ? जवाब अगर ना है तो आपके लिए इस बिजनेस को मना करना उचित नहीं होगा। यह बिजनेस को अपनाइए और सिर्फ दो से तीन वर्ष इस बिजनेस को कीजिए। मेरा दावा है कि 2-3 वर्ष बाद आप की दुनिया खुशहाल हो सकती है।

10. इस तरह  का काम करने में क्‍या सामाजिक प्रतिष्‍ठा घटती है ?   
   यदि मैं इस तरह का काम शुरू करता हूँ तो लोग क्‍या कहेंगे ?

आप जब कोई अनैतिक, समाज विरोधी या दूसरों को तकलीफ देने वाला कार्य करते हैं तो प्रतिष्‍ठा पर सवाल खड़े होते हैं। क्‍या आपको लगता है कि लोगों  को शिक्षा, फैशन, तकनीक, बीमा, एवं स्‍वास्‍थ्‍य के विषय में अवगत कराना कोई अनैतिक, असामाजिक  एवं गैर कानूनी कार्य है। बिल्‍कुल नहीं। परन्‍तु इस बिजनेस में आप लाखों लोगों को लाखों रूपये महीना कमाने का अवसर प्रदान कर सकते हैं। अब फैसला आपके हाथों में है। कि इस अवसर को पाना है या गंवा देना है। इससे बड़ी सामाजिक प्रतिष्‍ठा और क्‍या हो सकती है। अब रहा सवाल कि लोग क्‍या कहेंगे ? तो आइये इसे भी स्‍पष्‍ट  कर देते हैं।
आज तक इस दुनिया में कोई ऐसा आदमी नहीं पैदा हुआ, जिसकी लोगों ने आलोचना या निंदा नहीं की हो। आलोचना या निंदा से सिर्फ वही बच सकता है जो समाज के लिए निरउपयोगी  या निकम्‍मा है। फलदार वृक्षों पर ही पत्‍थर फेंके जाते हैं। कटीली झाड़ियों पर नहीं। लोगों के द्वारा  आलोचना किये जाना ही आपके सफल एवं सक्षम व्‍यक्तित्‍व का प्रमाण है। इसलिए आप वही करें जो आपको अच्‍छा लगता  है। लोक–निंदा की परवाह न करें।

11. मेरी  दिनचर्या  बिल्‍कुल ठीक चल रही है। क्‍योंकि मेरे पास एक
   अच्‍छ नौकरी है। फिर भी क्‍या मुझे इस बिजनेस को कर लेना
   चाहिए ?

दोस्‍त, जिस तरह कार कितनी भी अच्‍छी हो उससे आप अमेरिका नहीं जा सकते। उसी तरह नौकरी कितनी भी अच्‍छी हो उससे अमीर कभी भी नहीं बन सकते। क्‍योकि अमीर वह आदमी है, जो स्‍मार्ट वर्क कर रहा है। जैसे- आपका बॉस(मालिक)। आपकी तरह सैकड़ों लोग उसके पास काम करते है। जरा सोचिए। यदि आपका मालिक आपके काम करने से 5,000 रूपये  महीना कमाता है तो उसकी कुल मासिक आय 100 X 5000 = 50,0000 होगी। आपको मैं एक और हकीकत से अवगत कराना चाहूंगा । मान लीजिए आप अपना जाब करियर 10,000 मासिक से शुरू  करते हैं। तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आप 40 साल जॉब करने के बाद अपने आपको वहीं पायेंगे जहाँ से आपने अपने  करियर की शुरूआत की थी । क्‍योंकि  आपकी मासिक आय हर साल जितनी बढ़ेगी, महंगाई उससे भी ज्‍यादा बढ़ती चली जायेंगी। इसलिए इस सुनहरे अवसर को ना गवायें। यह बिजनेस ज्‍वाइन करें और अपने परिवार को आत्‍मनिर्भर, आजाद एवं खुशहाल बनाएँ।

12. बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जो स्‍मार्ट भी हैं। अच्‍छे वक्‍ता भी हैं, और   
   अच्‍छे-खासे पढ़े–लिखे भी हैं। परन्‍तु वह भी इस बिजनेस मैं असफल  
   रहे। क्‍या मैं इस बिजनेस में सफल हो सकता हूँ ?

जी हाँ, यकीनन आप शत–प्रतिशत सफल हो सकते हैं। यहाँ पर में एक बात स्‍पष्‍ट करना चाहूंगा कि स्‍मार्ट होना, अच्‍छा वक्‍ता होना, एवं अच्‍छा पढ़ा–लिखा होना सफलता हासिल करने के लिए सिर्फ एक पात्रता है और यह भी सच है कि सिर्फ पात्रता से सफलता नहीं मिलती। बल्कि सफलता पाने के लिए सफलता के सूत्रों का अनुसरण करना अति आवश्‍यक  है। उदाहरणतया – आपने कछुए और खरगोश की कहानी अवश्‍य सुनी होगी। खरगोश के पास दौड़  जीत ने की कछुए से अच्‍छी पात्रता थी, परन्‍तु जीता कौन ? कछुआ । तो आइये जानते हैं कि सफलता  के सूत्र  क्‍या हैं ?
      1. अपने भीतर सफलता का बोध करना।
      2. सपनों का ताना–बाना बुनना।
      3. अपने आप पर विश्‍वास रखते हुए खुद को व्‍यवस्थित रखना।
      4. लक्ष्‍य को निर्धारित करना।
5. लक्ष्‍य को पूरा करते समय आई हुई मुश्किलों को विश्‍लेषण करते हुए समझ एवं   
  सूझ-बूझ पैदा  करना।
6. लक्ष्‍य  को पूरा करने के लिए बिना रूके निरन्‍तर प्रयासरत रहना।
यदि आप इन सूत्रों का क्रमागत रूप से अनुसरण करते है तो मेरा दावा है कि सफलता अतिशीघ्र आपके कदमों में होगी। हां। इन सूत्रों को विस्‍तृत रूप से जानने के लिए मेरी एक किताब सफलता के नये आयाम को अवश्‍य पढ़े । सफलता  आपसे  बच कर नहीं निकल सकती है।

13. मैं यह बिजनेस ज्‍वाइन करने के लिए तैयार हूँ । क्‍योंकि अब मैं इसकी ताकत को भली–भांति समझ चुका हूँ। परन्‍तु  मैंने कुछ लोगों  से बात की है। कोई मुझ पर विश्‍वास नहीं करता है, न ही कोई ज्‍वाइन करने को तैयार हो रहा है। क्‍या करूँ ?

आपने जिन लोगों से बात किया है उन्‍हें अभी अधूरी जानकारी मिली हैं। क्‍योंकि अभी आप इस बिजनेस की ABCD भी नहीं जानते । यह बिजनेस प्‍लान एक क्रमागत प्रक्रिया  है जिसे शुरूआती दौर में आपको अपने सीनियर से समझना होगा और इस प्रकार धीरे- धीरे आप भी समझाने में निपुण हो जायेंगे। लोगों के सवालों का जवाब देना सीख जायेगे। फिर आपकी बातों का अनुसरण करते  हुए लोग आपके बिजनेस को ज्‍वाइन करते चले जायेंगे। इसलिए सर्वप्रथम आप अतिशीघ्र  सिस्‍टम  को अपनाईए और सफलता  हासिल कीजिए।
14. इस बिजनेस के बारे में लोगों की सोच से मैं भ्रमित हूँ । जरा सोचिए। जो लोग आपको सलाह दे रहे हैं कि बड़े ख्‍वाब न देखों। कुछ भी हासिल नहीं होगा। देख लेना यह कम्‍पनी कुछ दिनों में लापता हो जायेगी। उन्‍हें कैसे समझाऊँ ?
“चल  पड़ता हर आदमी, कामयाबी की डगर पर
क्‍या करे, इन्‍सान ही इन्‍सान के राहों का रोड़ा है।“
लोग तो भ्रमित करेंगे ही क्‍योंकि लोग खुद भ्रमित हैं। जरा सोचिए। जो लोग आपको सलाह दे रहे हैं, क्‍या वह लोग इस बिजनेस के प्रवक्‍ता या विशेषज्ञ  हैं। सलाह तो आपको वही दे सकता है जो इस बिजनेस को सफलतापूर्वक कर रहा है।
मंजिलें उन्‍हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है।
पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।
इसलिए आप मेरी माने तो बड़े–बड़े  सपने देखना शुरू कर दीजिए और काम करते हुए अपने हर सपनों को साकार कीजिए। अब रहा कम्‍पनी के लापता होने का सवाल तो आपको  जानकारी के तौर पर बता दें कि आज यह एक सशक्‍त कम्‍पनी है और सफलता के कई साल पूरे कर चुकी है। यह भारत सरकार द्वारा प्रमाणित है। इसलिए दोस्‍त। सपने देखिए और इस बिजनेस के साथ मिलकर अपना जीवन आत्‍मनिर्भर एवं आजाद बनाइए।

15. यह बिजनेस अच्‍छा तो है लेकिन दूसरों को बताने में जरा अटपटा सा लगता है तथा दूसरों को इस बिजनेस के बारे राजी करना बड़ा  मुश्किल लगता है। ऐसे में क्‍या करें?

यह बिजनेस इतना खूबसूरत बिजनेस है, जिसे  खेल–खेल में किया जा सकता है। जिस तरह जीने के लिए आप श्‍वास लेते हैं और छोड़ते हैं। यदि आपको यह बता दिया जाये कि श्‍वास को कितनी देर तक लेना है और कितनी देर में छोड़ना  हैं तो यही प्रक्रिया योग बन जाती है। जिससे आप का तन और मन दोनों स्‍वस्‍थ हो सकते हैं। इसी तरह आप अपने होश संभालते ही इस बिजनेस के पैटर्न पर चल रहे हैं पर आपको इसका ज्ञान नहीं है। जरा सोचिए। यदि आपको कोई चीज अच्‍छी लगती है तो आप क्‍या करते है ? आप उसकी प्रशंसा दूसरों से करते है यही तो है – बिजनेस क्‍या यह काम अटपटा सा लगता है। बिलकुल नहीं। इस बिजनेस की तारीफ करने से आपके घर में हजारों रूपये महीना आ सकता है। इस प्रकार आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होता है। अब रहा सवाल दूसरों को राजी करने का तो इसके लिए आपको खुद पर भरोसा और धैर्य रखना होगा। क्‍योंकि  शुरूआती  दौर में लोग आपका कम विश्‍वास करेंगे। परन्‍तु जब आप दृढ़ता से अपनी बात पर कायम रहेंगे, तो धीरे–धीरे लोग आपकी बात गम्‍भीरता  से सुनेंगे और आप पर विश्‍वास करते हुए आपके बिजनेस को ज्‍वाइन करेंगे।

16. शुरू में इस बिजनेस को लोग ज्‍वाइन तो करते है, पर कुछ समय में ही इसे बेकार बता कर इससे किनारा  कर लेते है। ऐसा क्‍यों ?

दरअसल किसी व्‍यवसाय में सफल होना व्‍यक्ति के विश्‍वास, धैर्य एवं उसके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। एक कथन है कि असफलताका अर्थ यही है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं हुआ । इस बिजनेस में वह लोग असफल हो जाते है जो अपने आपको बहुत स्‍मार्ट या बुद्धिमान  समझते हैं। सच तो  यह है कि किसी भी काम को करने का एक  सिस्‍टम या नियम होता है। जब तक आप उस सिस्‍टम को फॉलो नहीं करेगे असफलता  आपको अपने गले लगाती रहेगी। सच तो यह है कि किसी  भी काम को करने का एक सिस्‍टम या नियम होता है। जब तक आप उस सिस्‍टम को फॉलो नहीं करेंगे असफलता आपको अपने गले लगाती रहेगी। यदि यह मान लिया जायेकि यह बिजनेस बेकार है, तो जरा सोचिए। कि और लोग इस बिजनेस में कैसे सफल होते जा रहे है। मै आपको बताना चाहता हूँ कि इस बिजनेस में बहुत से लोग सफल चुके हैं।  बहुत लोग घर खरीद चुके हैं। कई  लोग  मोटर  साईकिल खरीद चुके हैं   तथा हजारों लोग विदेश भ्रमण कर चुके हैं।  इसलिए आप उनकी न सुनें जो लोग असफल हैं। उन लोगों का अनुसरण करें जिनके विचार सकारात्‍मक है। यह बिजनेस आपके लिए एक नई एवं खुशहाल दुनिया में प्रवेश-द्वार खोल  रहा है। याद रखिए असफल लोगों  की संगत असफलता दिलाती है और सफल लोगों की संगत सफलता क्‍योंकि  अमल से जिंदगी  बनती है जहन्‍नुम भी । जिसे जैसा बनना है वह वैसा अमल कर ले।

17. क्‍या डायरेक्‍ट  सेलिंग एक सुनहरा करियर है ?

जी हाँ, डायरेक्‍ट सेलिंग एक बहुत ही सुनहरा कैरियर है। क्‍योंकि लोग आज इसकी ताकत को समझ चुके हैं। अच्‍छे पढ़े-लिखे  लोग भी इस बिजनेस को अपना रहे हैं और सफलता की राह पर आगे बढ़े रहे हैं। आज पूरी दुनिया में हजारों कम्‍पनियाँ अपने प्रॉडक्‍टस एवं सर्विसेस को डायरेक्‍ट सेलिंग  के द्वारा बेच रही है आज बहुत सारे देशों के बिजनेस स्‍कूलों  में डायरेक्‍ट बिजनेस  सिस्‍टम पढ़ाया जाता है। इसलिए यह सिस्‍टम बड़ी  तेजी से पूरी दुनिया में फैल रहा है। एक और सच्‍चाई से मैं आपको अवगत कराना चाहूँगा कि आज भारत में भी बहुत सारी कम्‍पनियाँ अपने प्रॉडक्‍ट्स  को डायरेक्‍ट सेलिंग कम्‍पनी के जरिए बेच रही है। यह एक ऐसा बिजनेस है कि जिसमें किसी भी नुकसान का कोई खतरा नहीं है। जैसे – माल का चोरी हो जाना, माल जल जाना, चोरों के द्वारा कैश लूट ले जाना इत्‍यादि। इसलिए ज्‍वाइन कीजिए। निश्चिन्‍त हो जाइए और पैसा कमाइए।

18. सब कुछ तो ठीक है पर पैसा ही नहीं है, ज्‍वाइन कैसे करूं ?

दोस्‍त, अगर आपके पास पैसा नहीं है, तो यही सबसे अच्‍छी और खास वजह है इस बिजनेस को करने की। मान लीजिए ईश्‍वर न करें  आपके घर में कोई बीमार पड़ जाता है और आपको अचानक 10,000 रूपये  की जरूरत पड़ जाती है। क्‍या आप उनके ईलाज के लिए 10,000 रूपये की व्‍यवस्‍था नहीं करेंगे ? याद रखिए असफल लोग उसकी परिस्थिति व हालात को हार का कारण बताते है, ज‍बकि सफल लोग उसी परिस्थिति व हालात को अपनी जीत का कारण बना लेते हैं। आप अपने–आपको किस श्रेणी में रखना चाहेंगे ? सफल या असफल । दोस्‍त, इस बिजनेस को शुरू करने के लिए कमसे कम -------- रूपये के प्रॉडक्‍ट खरीदने  की जरूरत  है। आप सोच कर देखिए कि आज एक प्रॉडक्‍ट  खरीदने से कौन सा बिजनेस शुरू हो सकता है? जिससे आप हजारों रूपये हफ्‍ता कमा सकें। यदि आप बिजनेस  की गहराई समझ लेते हैं, तो  यह ----------- रूपये 100 रूपये के बराबर लगेंगे। इसलिए प्रॉडक्‍ट खरीदने के लिए शीघ्र  व्‍यवस्‍था कीजिए और बिना किसी विलम्‍ब प्रॉडक्‍ट खरीदकर इस बिजनेस की शुरूआत करें।



19. अब मुझे इस बिजनेस की खूबसूरती का पता चल चुका है। इस बिजनेस को मैं आज और अभी से शुरू करना चाहता हूँ । कृप्‍या बताएं कि इस बिजनेस की शुरूआत किस  तरह से करें ?

सर्वप्रथम आप एक  प्रॉडक्‍ट को लेकर यह बिजनेस ज्‍वाईन करें। साथ ही अपने स्‍पांसर से बिजनेस किट खरीदें और उसे पढ़े, देखें और समझे । यह बिजनेस बहुत ही बढ़िया साधन है आर्थिक आजादी को प्राप्‍त करने का । बस जरूरत है इस बिजनेस को सही सिस्‍टम  से करने की। तेजी से सफलता लेने के लिये ऑडियो, विडियो, सीडी का आर्डर करके उन्‍हें सुने व देखें।

20. यह बिजनेस इतना अच्‍छा है तो सभी लोग क्‍यों नहीं कर लेते ?

सर, आप बिल्‍कुल सही बोल रहे है हमें भी शुरूआत में ऐसा ही लगता था लेकिन  जब हमने इस बारे में गहनता से जाना तो पता चला कि ऐसे कई काम है जो बहुत से बढ़िया है लेकिन  सभी लोग नहीं करते हैं जैसे सवेरे की सैर करना स्‍वस्‍थ्‍य जीवन जीने के लिए एक वरदान है, उस से काया निरोगी रहती हैं। काया निरोगी है तो  उससे बड़ा सुख  कुछ नहीं हैं,  क्‍योंकि निरोगी काया  से ही सब चीजों का आनन्‍द लिया जा सकता है लेकिन सर,  क्‍या सभी लोग सुबह सैर करने जाते है ? नहीं, और भी बहुत से बढ़िया काम है जैसे – सर्वशक्तिमान का भजन सुमिरण करना, ध्‍यान करना तथा बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो बहुत ही बढ़िया  है ओर जिन्‍दगी के अलटीमेट मकसद है फिर भी क्‍या  सब लोग उसका फायदा  उठाते है ? शायद कुछ ही लोग। वैसे  सर, स्‍कूटर लेते समय आपने नहीं सोचा  कि सभी के पास स्‍कूटर नहीं है तो मैं कैसे ले लूँ 2 शादी  तो आपने लपक के कर ली,  उस समय तो आपने  दूसरे कुँवारों के बारे में नहीं सोचा तो  बिजनेस के लिए  ही खास तौर पर आप यह सवाल क्‍यों उठा रहे हैं ? ऐसा विश्‍व में कही भी नहीं होता है कि समाज के सभी लोग एक जैसा काम एक साथ करने लग जाए। सभी जानते है कि डाक्‍टर, इंजीनियर, चार्टेड –एकाउन्‍टेन्‍ट, एम.बी.ए, आई.ए.एस., आई.पी.एस इत्‍यादि की पढ़ाई मान-सम्‍मान और पैसा दोनो दिलाती है पर फिर भी सभी लोग इन क्षेत्रों  में नहीं जाते और न ही इन क्षेत्रों में भी सभी लोग एक जैसी सफलता अर्जित कर पाते हैं  यह हर व्‍यवसाय के लिए सच है और डायरेक्‍ट सेलिंग  बिजनेस के लिए भी सच है कि सब लोग इसमे नहीं आऐंगे।

21. मैं तो  ज्‍यादा लोगों को नहीं जानता।

सर, आप बिल्‍कुल सही बोल रहे है, हमें भी शुरूआत में यही लगा था, लेकिन जब हमारे अपलाईन ने समझाय तो हमें पता चला के ऐसी बात  नहीं है हम ज्‍यादा लोगों को जानेंगे तभी हम इस बिजनेस को कर पाऐंगें
सर, मान लीजिए कि एक व्‍यक्ति का नाम लिखने के लिए आपको 100 रू. दिए जाए तब आप कितने लोगों के नाम लिख सकते हैं ? ज्‍यादा लोगों को जानना  इस बिजनेस के  लिए बहुत अच्‍छा है, मगर इस बिजनेस की विशेषता यही है कि, इसमें अगर आप ज्‍यादा लोगों को नहीं भी जानते हैं, तब भी आप एक बड़ी सफलता हासिल  कर सकते हैं । इसके लिए आपको इतना ही करना है, ऐसे कुछ लोगों की तलाश कीजिए, जिनकी पहचान ज्‍यादा लोगों के साथ। तथा अनजान लोगों के माध्‍यम से इस बिजनेस को बढ़ा सकते हैं। बहुत से सफल लीडर्स  भी अपनी अपलाईन के लिए अनजान थे।

22. मैं न तो सेल्‍समैन हूँ और न मैं वैसा काम कर सकता हूँ।

मैं आपकी बात को समझ सकता हूँ । शुरूआत मैं मुझे भी ऐसा ही लगा था, लेकिन बाद में मैंने पाया, कि सौभग्‍य से मेरी अपलाईन , टीम और सिस्‍टम, इसके लिए मदद हेतु आगे आई। मुझे  तो सेल्‍समैन की तरह काम करने की कभी जरूरत ही नहीं पड़ी। हम विशेष तौर किसी  सेल्‍समैन की तलाश नहीं करते। सभी तरह के लोग और व्‍यवसायी इस बिजनेस में सफलता हासिल कर चुके हैं। वैसे यह कोई घर–घर जाकर प्रॉडक्‍ट बेचने का कार्य नहीं है, यह तो लोगों को अवसर देने का सिस्‍टम है, प्रॉडक्‍ट तो कंपनी खुद–सीधा पर पहुंचा देती है।
23. मैं अपने परिवार का समय इसमें नहीं लगा सकता।

आपने बहुत अच्‍छी बात कही, देखिए यह एक पारिवारिक बिजनेस है, इस बिजनेस को हम अपने परिवार के साथ मिलकर ही कर सकते हैं इसलिए हमारी परिवार में आत्‍मीयता और बढ़ जाती है। अपने बच्‍चों के भविष्‍य की चिंता और परिवारके साथ अधिक समय बिताने की चाहत ही इस बिजनेस को करने की सबसे बड़ी वजह बन सकती है।

24. मेरे पास  पैसे नहीं है।

सर आप बिल्‍कुल सही बोल रहे हैं, हम आपकी बात समझ  सकते है,  क्‍योंकि जब ये प्‍लान  हमने देखा था। तो हमारी भी यही हालत थी। लेकिन  हमारे स्‍पॉन्‍सर ने बताया कि आपके पास पैसे नहीं है तो आपके लिए इस बिजनेस को करना और भी जरूरी है। क्‍योंकि अगर आप केवल  वही करते रहे जो पहले से कर रहे थे, तो ये निश्चित है कि आपकी आर्थिक  हालात  ज्‍यादा सुधरने वाली नहीं है इसलिए आपको कुछ  और भी करने की जरूरत है। और अगर आप इस काम को करना चाहते हैं, तो यह कोई बात नहीं हुई कि अब सिर्फ 1 प्रॉडक्‍ट खरीदने के लिये भी पैसे नहीं है, मान लिया भगवान ना करें कोई इमरजेंसी  पड़ जाती है लेकिन आपके पास पैसे नहीं है तो आप क्‍या करते हैं ? कहीं न  कहीं  से प्रबन्‍ध  करते हैं। क्‍यों ? क्‍योंकि जिन्‍दगी  है। लकिन सर, अगर  हम जान बचाने के लिए पैसों का प्रबन्‍ध कर सकते हैं तो क्‍या जिन्‍दगी बनाने के लिए प्रबन्‍ध  नहीं करना चाहिए । लेकिन अब  सवाल यह है कि हमें  अब  इस आपरचुनिटी के लिए इंतजाम  करना ही चाहिए या नहीं ? हमें बताया गया था कि हमारे पास दो तरीके हैं  या तो हम पैसों के बन्‍दोबस्‍त के लिए  हाँ करेंगे या न करेंगे। और हँ करेंगे तो क्‍या हो सकता है तथा ना करेंगे  तो क्‍या सम्‍भावना बन सकती है-


अगर No  बोलते हैं क्‍या हो सकता है ? हमारी आर्थिक  अवस्‍था  तो ऐसी  ही रहेगी  और अगर  बच्‍चों  की अच्‍छी शिक्षा  की बात आएगी तो क्‍या कहेंगे No, Car  के लिए No, नए घर के लिए No, विदेश यात्रा के लिए No, Madam के लिए Jewellery – No, Parents Pilgrimage- No और No हमेशा हमारे साथ लगा रह सकता है। लेकिन दूसरी अवस्‍था में अगर  Yes कहते हैं और System के मुताबिक काम करते हैं तो हम ऊपर लिखी सब चीजों  के लिए Yes बोल सकते हैं । सर- आप क्‍या चुनना चाहेंगे जिन्‍दगी  भर हाँ- हाँ करना  चाहेंगे या ना – ना । यदि हाँ हो तो बधाई हो, हम शुरूआत करते हैं।

25. यह तो संतृप्‍त (सभी लोग प्रॉडक्‍ट खरीदने पर Saturate  हो जाना) होने जा रहा है, बाद वालों का क्‍या होगा ?

आप बिल्‍कुल सही बोल रहे हैं  मुझे भी लगा था कि अगर सब इस बिजनेस को करेंगे तो फिर क्‍या होगा, लेकिन जब मैंने गहराई से इसे समझा तो पता चला कि ऐसी कोई चिन्‍ता वाली बात नहीं है क्‍योंकि हर दिन जितने लोग इस बिजनेस को शुरू करते हैं, उससे कई गुणा ज्‍यादा लोग 18 वर्ष की आयु में प्रवेश भी करते हैं । इस हिसाब से चाहे  कितनी भी तेजी से हमारा बिजनेस नेटवर्क बढ़ता रहे। वो बढ़ती आबादी की रफ्‍तार से पार नहीं पा सकता, इसलिए बिजनेस के संतृप्‍त होने की कोई संभावना ही नहीं है, वैसे आप ये भी सोच सकते है TV आज  हर घर  में है, फिर  भी TV का बाजार  संतृप्‍त नहीं हुआ क्‍यों ? क्‍योंकि  हर पल नई पीढ़ी जवान हो रही है और नये घर बस रहे हैं, यदि हर रोज  बच्‍चे पैदा हो रहे हैं तो ये बिजनेस भी तबतक संतृप्‍त नहीं होगा जब तक जनसंख्‍या  हर रोज बढ़ती  रहेगी। सर, क्‍या लगता है ? जनसंख्‍या बढ़ती रहेगी या बन्‍द होने  वाली है? बढ़ेगी ? अगर बढ़ेगी, तो बधाई हो, यह बिजनेस भी ऐसे ही चलता रहेगा।

26. यह मेरे लिए नहीं है।

मैं आपकी बात का मतलब समझ नहीं पाया, आखिर कौन -  सी बात आपके लिए नहीं है, धन कमाना या औरों की मदद करना ?

27. मेरा सब कुछ ठीक  चल रहा है, मुझे इस बिजनेस को करने की क्‍या जरूरत है ?

सर,  जब कोई मुश्किल आती है तो पहले से तो पता नहीं होता  इसलिए ऐसे काम हमें तभी करने चाहिए जब सब ठिक चल रहा होता है क्‍योंकि अगर व्‍यक्ति मुश्किल में है तो वैसे ही यह काम करने में उसको ज्‍यादा परेशानी आ सकती है। जिस प्रकार प्‍यास लगने पर कुआँ नहीं खोदा जा सकता, कुआँ तो पहले ही खोदकर रखना चाहिए। आपके थोड़े प्रयास से पीढ़ियों  तक आमदनी आ सकती है और आप अपने परिवार के लिए अमर हो सकते हैं।
28. मैं जानता हूँ  यह बहुत अच्‍छा है पर मैं किसी को राजी नहीं कर सकता ।

जब मैंने इस बिजनेस को देखा था तो मुझे भी ऐसा ही लगा था, लेकिन बाद में मेरे स्‍पान्‍सर  ने मुझे  बताया कि यह बिजनेस वास्‍तव में किसी को राजी करना, मक्‍खन लगाना, या पटाने का काम नहीं हैं। यह  बिजनेस तो जानकारी देने का बिजनेस है। रिक्‍मेण्‍ड करने का बिजनेस है और रिकमेण्‍डेशन  तो हम जाने अनजाने में करते ही रहते हैं।  कि यह डाक्‍टर अच्‍छा है, यह पिक्‍चर बहुत अच्‍छी है, स्‍कूल  बहुत अच्‍छा है, ये सब तो आप अनजाने में कर ही रहे हैं। फिर  इसमें कौन सा अलग काम है इसमें भी आप बेहतरीन और जिन्‍दगी  बदलने वाले ब्राण्‍डेड प्रॉडक्‍ट हैं और यह जिन्‍दगी बदलने वाला  बिजनेस है। यही तो बताना है।
दूसरी बात यह है कि इसके लिए ऐसा नहीं है कि हमने  कोई व्‍यक्ति विशेष को खुश करना हे। बस  यह अच्‍छा बिजनेस है यह जानकारी कुछ लोगों से बाँटनी भर है जो लोग इच्‍छुक  होंगे वे अपने आप सहमत हो जाऐंगे । वैसे भी ये दूसरों की जिन्‍दगी बदलकर अपनी जिंन्‍दगी बदलने का अवसर है ना कि दूसरों को राजी करने का । कहा भी गया हैं :-
“झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।“
लेकिन हम यहाँ कहते हैं
“उठती है दुनिया, उठाना वाला चाहिए ।“
जैसे मुझे, मेरे स्‍पांसर ने यह जानकारी प्रदान करके, मेरी और मेरे परिवार  की जिन्‍दगी बदल दी है ऐसे आप भी कुछ  लोगों को भला कर सकते हैं। और सबसे  बड़ी बात है, बड़े-बड़े सुपर स्‍टार, खिलाड़ी  तथा प्रसिद्ध  हस्तियां आजकल रिकमण्‍डेशन का कार्य कर रहे हैं तो हमें करने में कैसा संकोच।

29. क्‍या इस बिजनेस में कैसट  खरीदना, मीटिंग में जाना और सेमीनार अटेण्‍ड  करना जरूरी है ?

आपका सवाल बहुत बढ़िया है। आप को मालूम  होगा की डायरेक्‍ट सेलिंग व्‍यवसाय में आप एक IBO (स्‍वतन्‍त्र बिजनेस के मालिक) Independent  Business Owner की हैसियत  से कार्य करते हैं। इसलिए कोई भी  चीज  आप पर थोपी नहीं जा सकती है। ये सब वैकल्पिक होता  है लेकिन इस बिजनेस का पोटेंशियल समझाने  के लिए या किसी को समझने  के लिए कैसेट या मीटिंग या सेमीनार  बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। बहुत से लोगों ने इस बिजनेस को करने का या उसमें सफलता  पाने का निर्णय किसी न किसी  सेमीनार में ही लिया है। दूसरी बात  यह कि कई बार प्रयास करने के बाद भी लोगों को इस बिजनेस में रिकमेण्‍ड करने  में दिक्‍कत आने लगती है  और आदमी निराश होने लगता है। ऐसी स्थिति में भी मीटिंग या सेमीनार आपकी डिस्‍चार्ज  बैटरी में फिर से जान डाल देते हैं। जैसे कुआं  खोदते समय पत्‍थर मिलना लाजमी है, उसी तरह इस बिजनेस में दो चार पत्‍थर दिमाग लोगों का मिल जाना जरूरी है, मीटिंग, कैसेट या सेमीनार से इस परीक्षा को पास करने में मदद मिलती है। कैसेट खरीदकर सुनने में, मीटिंग में या सेमीनार में जाने से पैसे बरबाद नहीं होते, लेकिन इनवेस्ट  होते हैं जिसका रिटर्न कई गुना ज्‍यादा मिलता है।

30. कम्‍पनी भाग गई तो ?

आप सही सोच रहे हैं बहुत सारी कम्‍पनी आ-जा रही हैं । मैं  इस परिस्थिति में आपकी बात समझ सकता हूँ। और पहले मुझे भी ऐसा ही लगता था लेकिन जब मुझे पता चला कि इस दुनिया में सारी चीजें एक जैसी नहीं होती हैं। एक पानी के गिलास का शीशा होता है और एक बुलेट प्रुफ शीशा होता है। पानी के‍ गिलास वाला शीशा तुरन्‍त टूट जाता है लेकिन बुलेट प्रुफ शीशा बन्‍दुक की गोली से भी नहीं टूटता। इससे ये सिद्ध होता है कि इस दुनिया में दोनों तरह की कम्‍पनियॉ होती है, अगर भागने वाली है तो टिकने वाली भी है जैसे यह डायरेक्‍ट सेलिंग कम्‍पनी (56 साल से) टिकी हुई हैं। सर, जी फिर भी मैं आपसे  पूछना चाहूँगा कि अगर कोई  डायरेक्‍ट सेलिंग कम्‍पनी भागती हैं तो क्‍यों भागती है ? फिर भी, आप नहीं बता पा रहे है, तो मैं आपकी मदद करता हूँ। 
1. जो गैर कानुनी हो ?
2. जो घाटे में आ जाए ?
3. जिसका मैनेजमेंट फेल हो जाए ।
4. या, वे कम्‍पनी भी भाग सकती हैं जो लोगों का बहुत सारा पैसा इकट्ठा कर लें।
देखिए ये डायरेक्‍ट सेलिंग कम्‍पनी कानुनी तौर पर सही है तभी तो 56 सालों से चल रही है। ये घाटे में रह नहीं सकती क्‍योंकि ये कोई उधारी का व्‍यापार नहीं करती हैं, यह पहले पैसे लेती है और बाद में प्रॉडक्‍ट या पैकेज भेजती है इसलिए इसका घाटे में रहने का कोई चान्‍स ही नहीं है। पूरा इंटरनेट के माध्‍यम से व्‍यापार है इसलिए मैनेजमेंट फेल होने का सवाल ही नहीं उठता है। अब रही बात पैसा इकट्ठा करने की , यह कम्‍पनी साप्‍ताहिक पे आऊट देती हैं। इस प्रकार पैसे इकट्ठा होने का भी कोई संयोग नही है। वैसे सर, आज की तारीख में डायरेक्‍ट सेलिंग कम्‍पनी दिन दूगनी रात चौगुनी उन्‍नति कर रही हैं तथा वह भी कानून व नैतिकता के दायरे में रहकर । अगर आप इस कम्‍पनी के डायरेक्‍टर होते और आपको करोड़ो रू. सालाना आदमनी होती तो आप उस कम्‍पनी को चलाना चाहेंगे या बंद करना चाहेंगे ? चलाना चाहुँगा। बहुत बढ़िया, तो सर आप बिल्‍कुल निश्चित रहिए। ये भी समझदार हैं। ये इस फयदे को लगातार लेते रहेंगे । सर आप समझ सकते हैं ?

31. फिर भी मैं जरूर जानना चहुँगा कि आखिर भागने वाली बहुत
    कम्‍पनी हैं जो भागती हैं वे कैसी होती हैं उनकी क्‍या पहचान है ?

आपका सवाल बहुत बढ़िया है, पहले तो मैं भी यही सोचता था कि सब कम्‍पनी एक जैसी होती है लेकिन इस सिस्‍टम में आकर पता चला कि मोटे तौर पर कोई भी 05 प्रकार की कम्‍पनी होती है। जो इस प्रकार है :-
1. वित्तिय कम्‍पनी ------------- जो कुछ ही समय में पैसे को डबल करने का वायदा करती है जैसे 3 साल 4 साल में इत्‍यादि । सोचने वाली बात यह है कि इतने बड़े देश की सरकार का SBI Bank 4 साल में डबल नहीं कर पाती है, Reliance जैसी बड़ी कम्‍पनी नहीं कर पाती है तो एक आम कम्‍पनी 3, 4 या पाँच साल में डबल कैसे कर पाएगी ? शायद नहीं कर पाएगी लेकिन लेकर जरूर भाग जाएगी। इनकी पहचान ये होती है कि बैंक और पोस्‍ट ऑफिस की तुलना में जल्‍दी डबल करने का वायदा करती हैं और जिसे पूरा करने का सवाल ही नहीं उठता है। इनसे बचकर रहने में ही भलाई है।
2. मनी सरकुलेशन स्‍कीम या चिट फंड या मनी पिरमिड स्‍कीम ------------- इस प्रकार की कम्‍पनियों पर सरकार की तरफ से प्रतिबन्‍ध होता है जो 1978 के Act के मुताबिक लागू है लेकिन फिर भी लेाग चोरी छिपे ऐसी स्‍कीम चलाते है तथा जब भी पकड़े जाते हैं उनकी स्‍कीम बन्‍द हो जाती है। ये इस प्रकार का लालच देती है कि आप 2000 देकर मेम्‍बर बन जाओ। इसके बाद आप भी 2000 वाले चार मेम्‍बर बना दो आपको 1600 रू० का चैक मिलेगा । इसकी खास पहचान यह है कि इसमें केवल पैसा घूमता है यहाँ कोई भी प्रॉडक्‍ट नहीं होता है। ऐसी कम्‍पनियों से बचने में भलाई है क्‍योंकि 1978 के Act के अनुसार इनपर प्रतिबंध होने की वजह ये इनका भागना निश्चित होता है।
3. कॅामर्शियल समान बानाने वाली कम्‍पनियँ ----------- ये कम्‍पनी ऐसी होती है जो सामान बानती है और परम्‍पारिक तरीके से बाजार में सामान बेचती है। जिनकी डिमाण्‍ड ओैर सप्‍लाई कार्य चलता रहे तो ये चलती रहती हैं और नहीं चले तो मालिक इनको बन्‍द कर देता है लेकिन इस केस में आम जनता को कोई नुकसान या फायदा नहीं होता है।
4. डायरेक्‍ट सेलिंग कम्‍पनी --------------- ये कम्‍पनी कुछ प्रॉडक्‍ट बेचती है वह भी नेटवर्क के माध्‍यम से। यह नेटवर्क के माध्‍यम से जो Team बनाती है उस पर रेफरल कमीशन बाँटती है। ये कानूनी तौर पर भी सही होता है। यहाँ पर सीधी सी बात है, काम का पैसा मिलता है (बिक्री पर पैसा मिलता है) जो सम्‍भव भी है लेकिन कुछ नेटवर्क कम्‍पनी Non-Working Plan लेकर आती है जो कि सम्‍भव नहीं है की बिना काम का पैसा कहाँ मिलता है ? काम करके पैसा मिलने वाली कम्‍पनी में कहीं भी कोई भी दिक्‍कत नहीं होती है। लेकिन इनके साथ कुछ उल्‍टा ही हो जाता है। पहले और दूसरे नं. की कम्‍पनियों के मामले मे वे लोगों को छोड़कर भागती थी लेकिन डायरेक्‍ट सेलिंग कंपनी मामला कुछ उल्‍टा ही होता है कि लोग काम करना बन्‍द कर देते हैं या कम्‍पनी को छोडकर चले जाते हैं और और कम्‍पनी बंद हो जाती है। लेकिन  अगर डायरेक्‍ट सेंलिंग में मजबूत LEADERS है तो सेल्‍स आती रहती है और कंपनी हमेशा चलती रहती है। वैसे भी डायरेक्‍ट सेलिंग कम्‍पनी का भागने का सवाल ही नहीं उठता है क्‍योंकि पैसे के बदले में सामान मिल ही जाता है इसके इलावा भागने का सवाल ही नहीं उठता है उदाहरण के तौर पर आपने बाजार से एक पैन खरीदा और कुछ दिन बाद वह दुकान बन्‍द हो जाती है तो क्‍या हम यह कहते है कि फलाना दुकानदार हमारे पैसे लेकर भाग गया ?  वैसे ही यह  कम्‍पनी आज की तारीख में डायरेक्‍ट सेलिंग के इतिहास का ब्रान्‍ड बन चुकी है।

32 यह बिजनेस नहीं चलता हम कइयों को जानते हैं, जो इसको छोड़ चुके । 

सर, आप बिल्‍कुल सही बोल रहे हैं, मैं आपकी बात समझ सकता हूँ। पहले मैं भी यही सोचता था। लेकिन जब मुझे वास्‍तविकता का पाता चला तो पाया कि ऐसा नहीं है। यह ऑकड़ों से जाहिर होता है कि लगभग पचास प्रतिशत लोग इस बिजनेस को तीन महीनों के भीतर छोड़ देते हैं और उनमें से अधिकांश बिना किसी से बात किए ही इसे छोड़ देते हैं। आप ऐसे कईयों को जानते हैं जो पी एम टी टेस्‍ट में फैल हो गए तो क्‍या पी. एम. टी. बन्‍द कर दी जाए या फिर मेडीकल कॉलेज में ताला डाल दिया जाए, डॉक्‍टर बनने के लिए आप किस के सम्‍पर्क में आऐंगे जो पी एम टी पास हो गया या उसके जो पी.एम.टी फेल हो गया। क्‍या आप ऐसे लोगों को नहीं जानना चाहेंगे जिन्‍होनें इस बिजनेस में  सफलता पाई है। आप अपने बच्‍चों  को किस के साथ देखना पसंद करेंगे जो पढ़ने में होशियार है या जो फेल होता रहता हैं ? आपके बगैर यह बिजनेस लगभग सभी राज्‍यों में चल रहा है और ये वर्षों तक चलता रहेगा । यह चुनौती पूर्ण लेकिन सरल काम है जिसे सीखकर किया जा सकता है। आप जैसे Background के लोग आज भी कर रहे है इसलिए असफल लोगों से नहीं सफल लोगों से शिक्षा लें।

33. हमारे बच्‍चे छोटे हैं।

सर, बहुत बढ़िया, बच्‍चो के बारे में सोचना हमारी नैतिक व सामजिक जिम्‍मेदारी है। आपके पास अपने बच्‍चों के भविष्‍य की क्‍या योजना है ? वो किस तरह के खिलौनों से खेलेगे ? वो‍ किस गाड़ी में और किस स्‍तर के स्‍कुल में पढ़ने जाऐंगे ? वो किस किस्‍म के कपड़े पहनेगे ? आप उनको कितना समय दे पाऐगे ? अगर इन सवालों का जबाव देने में आपको पसीना सा आ रहा है तो आप ठीक दिशा में सोच रहे हैं कि आपको इस डायरेक्‍ट सेलिंग को गंभीरतापूर्वक करना शुरू कर देना चाहिए। बच्‍चों को बिजनेस नहीं करने का बहाना बनाने की बजाय आप बच्‍चों को इस बिजनेस को करने का कारण बना सकते हैं, और उनके सुखद भविष्‍य की नींव रख सकते हैं। आखिर मॉ बाप बच्‍चे के लिए क्‍या नहीं कर सकते ? और आप ये साधारण – सा बिजनेस करने  से डरते है जो उस बच्‍चे को हमेशा के‍ लिए आराम देने वाला है।
अगर आपके बच्‍चे छोटे हैं तो पति – पत्नि में से एक को ही बिजनेस में लगाना चाहिए और दूसरे को बच्‍चे की देखभाल में पूरा समय देना चाहिए ( जैसे हमारे कई लोगों ने किया है) इसलिए भगवान ने बच्‍चे के पीछे मॉ और बाप दोनों को रखा है  ताकि एक उसका लालन पालन करें व ख्‍याल रखे तथा दूसरा उसको सपनों की जिन्‍दगी जीने में सक्षम बनाने के लिए एक लगातार आते रहने वाली आमदनी को पैदा कर सके। और अगर थोडे़ भी विवेकशील लोग है और आदर्श  माता – पिता हैं। तो जरूर एक Passive आमदनी का बन्‍दोबस्‍त करना चाहिए ताकि जीवन में कुछ भी चुनौती आए उसका जिन्‍दगी में, बच्‍चों के लालन – पालन और भविष्‍य पर कुछ भी फर्क ना पड़े।

34. लोग इस बिजनेस के नाम से बिदकते हैं आने का बोलकर नहीं आते हैं।

आप बिल्‍कुल सही बोल रहे है मैं समझ सकता हूँ। मेरे साथ भी कई लोगों ने ऐसा ही किया था लेकिन जब मुझे पता चला कि इस बिजनेस में 10 – 7 – 4 – 1 का फार्मूला काम करता है तो समझ गया, दस में एक आदमी इस बिजनेस में आता है और वही काफी है। कुछ लोगों की नजरों में उनकी स्‍वयं की छवि धुंधली होती है और उनका आत्‍मविश्‍वास बड़ा कमजोर होता है। यह वे लाग होते है जो   संतोषी सदा सुखों की गोली खाकर बड़े हुए है और आत्‍मविश्‍वास की कमी के कारण किसी भी काम को हाथ मे लेने से डरते है। आपको हर बिजनेस में ऐसे लोग मिल जाऐंगे जो टालमटोल करने में विश्‍वास रखते है। पर ऐसे लोगों के आने से भी कोई खास फायदा नहीं होता । ये अगर आ भी जाएं तो छोडकर भागने में ज्‍यादा वक्‍त नहीं लगाते। पैसे की गरीबी उतनी दुखदायी नहीं होती जितनी प्रगति के लिए आकुलता की कमी। जो अपनी दुर्दशा से संतुष्‍ट हैं उसके लिए सुखद अवसर कहाँ से, कैसे और क्‍यों कर आएगा। इसलिए हमसे जो बिदकते हैं उनकी चिन्‍ता नहीं करनी है। जो लोग हर रोज भगवान के समने अगरबत्‍ती लगाते है और कहते है भगवान मेरी किस्‍मत अच्‍छी कर दे, मैं आम जिन्‍दगी नहीं जीना चाहता, और कहता है, बस एक बार मौका दे दे अगर परिवार का इतिहास ना लिख दिया तो कहना।
अगर आपके घर में लड़का या लड़की पैदा हुई है तो मतलब साफ है कि भगवान ने उसके लिए लड़की या लड़का पहले ही पैदा कर दिया है जिसके साथ उसकी शादी होगी, आपका काम तो उसको खोज निकलना है। अगर आपको भागवान ने यह बिजनेस दे दिया है, तो भी मतलब साफ है कि भगवान ने वो लोग पहले ही भेज दिए है, जो आपका बिजनेस में सहयोग करेंगे। आपकी जिम्‍मेदारी तो सिर्फ इ‍तनी है कि आप बस उन लोगों को खोज निकाले। ऐसे लोगों जो बोलकर भी नहीं आते वे आपकी खोज का हिस्‍सा नहीं है। उन लोगों की परवाह करके अपने भविष्‍य खतरे में क्‍यों डालते हैं ?

35. ये बड़ा कठिन काम है. सफलता की संभावना बहुत कम है।

यह प्रारंभ में ही स्‍पष्‍ट किया गया है कि डायरेक्‍ट सेलिंग सरल है पर असान नहीं है। आई.ए.एस, आई.पी.एस., कास्‍ट - एकाउन्‍टेन्‍ट, सी. ए., सी एस. आदि में सफल होने वालों का प्रतिशत 0.5-0.7% ही रहता है। कष्‍ट और कठिनाई का व्‍यवधान उन्‍नति की हर दिशा में मौजूद रहता है। ऐसी एक भी सफलता नहीं है जो कठिनाई से संघर्ष किए बिना ही प्राप्‍त हो जाती हो। जीवन के महत्वपूर्ण मार्ग विघ्‍न-बाधाओं से सदा भरे रहते हैं। यदि परमात्‍मा ने सफलता का कठिनाई के साथ गठबंधन न किया होता, उसे सर्व सुलभ बना दिया होता, तो यह मनुष्‍य जाति का सबसे बड़ा दुर्भाग्‍य होता ।

36. पैसा सब कुछ नहीं होता । पैसे से मानसिक शान्ति नहीं मिलती है।

सम्‍पन्‍नता और मानसिक शान्ति का संबंध व्‍यक्तिगत स्‍वभाव पर निर्भर करता है। पैसा पानी की तरह है जिसमें मिलाओं वैसा ही रंग हो जाता है, दूध में मिलाओ दूध जैसा, शराब में मिलाओं तो शराब जैसा । ये केवल भ्रांति मात्र है कि पैसा लोगों का दिमाग खराब कर देता है और उसे घमण्‍डी बना देता है, ऐसा कुछ भी नहीं है, पैसा अपने आप में एक ऐसी चीज है जो मनुष्‍य को उसकी प्रवृति के अनुसार कार्य करने की क्षमता बढ़ाता है। अगर अच्‍छी प्रवृति है तो वह और अच्‍छा बन जाता है और अगर बुरी प्रवृति है तो और बुरा बन जाता है। दूसरी बात, बहुत सारे गरीब लोगों को भी मानसिक शान्ति प्राप्‍त करने के लिए धन्‍ना सेठ होना जरूरी नहीं है लेकिन पैसे की कमी के कारण आप ऐस तत्‍व से वंचित रह जाते है जो जीवन को रंगीन बनाते हैं। पैसे से खुशी नहीं खरीदी जा सकती लेकिन असुविधाऍ जरूर कम की जा सकती है। यदि आपको हर समय यह चिंता सताती रहती  है कि डाक्‍टर की फीस कैसे अदा की जाएगी ? किताबों और स्‍कूल की फीस कब तक दी जा सकेगी ?  बिजली या फोन का बिल कम कैसे आए ? क्‍या इस साल भी घर पुताई नहीं हो पाएगी ? तो आपका मन कैसे शान्ति का अनुभव कर सकता है।  अगर पैसों की कमी के कारण आपको गंदी बस्‍ती में रहना पड़ रहा है और आपको यह चिन्‍ता लगी रहती है कि इस वातावरण का मेरे बच्‍चों पर क्‍या असर पड़ेगा, तो आपको मानसिक शान्ति कैसे मिल सकती है ? सम्‍पन्‍न लोग मानसिक शान्ति के साथ जीते हैं पर अगर व्‍यक्ति की मुख्‍य चिन्‍ता यह  हो जाए कि सम्‍पन्‍नता की रक्षा किसी भी तरह की जाए तो मानसिक शान्ति गायब हो जाती है।  मनुष्‍य संपत्तियों से नहीं वरन अपने विचारों एवं नजरिये के कारण ही शान्‍त ओर सुखी रह सकता है। गुण, कर्म और स्‍वभाव को उच्‍चस्‍तरीय बनाये बिना, कर्तव्‍यों को आनन्‍दपूवर्क निभाये बिना प्रचुर संपत्ति प्राप्‍त कर लेने पर भी चैन से नहीं रहा जा सकाता। व्‍यक्ति की अंत –चेतना अगर निकृष्‍ट स्‍तर की बनी रहे तो कुबेर जैसा धन और इन्‍द्र जैसा वैभव होते हुए भी उसे असंतोष  एवं विमोक्ष की ज्‍वाला से जलते रहना होगा। दरिद्ररता या संपन्‍नता इससे तय नही होती कि किसी व्‍यक्ति के पास क्‍या है बल्कि इससे तय होती है कि वह क्‍या है, यह बिजनेस आपको कितना धन देगा यह तय नहीं है पर यह तय है कि इसकी शिक्षा से आपको ह्दय की विशालता का आभास आपको हो जाएगा। इसका एजुकेशन सिस्‍टम बहुत शानदार होता है। यह बिजनेस आपके व्‍यक्तित्‍व को निखारेगा और आपकी विचारधारा को सकारात्‍मक और प्रगतिशील बानयेगा, इसमें किसी को भी रत्‍ती भर का संदेह नही करना चाहिए।
बिल्‍कुल नीरस एवं उपेक्षित हो जाती जो वस्‍तु जितनी कठिनाई से और जितना खर्च करके मिलती है वह उतनी ही आनंद दायक होती है। प्रतिभा किसी पर आसमान से नहीं उतरती वह अन्‍दर से ही जागती है। उसे जगाने के लिए केवल मनुष्‍य होना ही पर्याप्‍त है। वह अन्‍य कोई प्रतिबंध नहीं मानती। वह सर्वगुणों को छोड़कर रैदास और कबीर का वरन करती है तो कभी सिद्धार्थ और महावीर जैसे राजकुमारों पर भी विराजती होती है, बलवानों, सुन्‍दरों को छोड़कर गॉधी जैसे कमजोर शरीर और चाणक्‍य जैसे कुरूपों को वह प्राप्‍त होती है। उसके अनुशासन में जो आ जाता है वह बिना किसी भेदभाव के उसका वरण कर लेती है और अब यह कठिन काम है इसलिए तो इसे करना है वरना आप अपने  बच्‍चों  को I.C.W.A., मेडिकल या इंजीनियरिंग कालेज में जाने  के नाम से डरा क्‍यों नहीं देते?
किसी ने क्‍या खूब कहा है-
अगर आसमान को जिद्द है बिजलियाँ यहाँ गिराने की ।
तो हमें भी जिद्द है आशियाँ यहाँ बनाने की।

37. इसमें  आना था तो पहले आना था। जो पहले आ गए वो अच्‍छा कमा गए अब इसमें कुछ नहीं रखा है। इसमें तो अब सेचुरेशन है।
यह सारा बिजनेस प्रोडक्‍ट पर आ‍धारित है जिनकी संख्‍या समय के साथ बढ़ती है, अत: इसमें आने का सबसे सही समय अभी है। पहले आना था कह कर आप यह तो मान रहे हैं कि आप पहले न आकर गलती कर चुके हैं अब आप दूसरी गलती यह कर रहे हैं कि इसमें आने में देर कर रहे हैं। अगर आप अपनी जानकारी थोड़ा बढाएँ तो आपको यह पता चल जाएगा कि नेटवर्क मार्केटिंग में ऐसा कई बार हुआ है कि नए ऐसोसिएट (Associate) ने पुराने ऐसोसिएट  को पीछे छोड़ दिया है। ऐसे भी कोई Associate है जो बाद में आए. पर जिनकी आमदनी आपनी अपलाईन से बहुत ज्‍यादा है। इस बिजनेस में आपकी आमदनी आपके आने के समय से तय नहीं होता बल्कि तय हाती है आपकी लगनशीलता से तथा आपकी प्रतिबद्धता से तय होती है। यह कोई पिरामिड स्‍कीम या चैन सिस्‍टम नहीं है। अत: यह सोचना बिल्‍कुल गलत है। आप अपनी अप लाईन से ज्‍यादा नहीं कमा सकते है। यह सेचुरेशन की बात करते हैं। आज आपको हर हाथ में घड़ी दिखाई पड़ती है तो क्‍या घड़ी से सेचुरेशन हो गया ? हर घर में टी.वी. फ्रिज, पंखे, साईकिल, मोटरसाईकिल, दिखाई पड़ती है तो क्‍या इनसे सेचुरेश्‍न हो गया है ? ऐसा नहीं है क्‍योंकि उपभोक्‍ता शाश्‍वत है अत: सेचुरेशन जैसी कोई बात नही है।

38. हम घर–घर जाकर हाथ नहीं जोड़ सकते और न ही किसी का दरवाजा खटखटा सकते हैं। हम सेल्‍समैन जैसा काम नहीं  कर सकते।

सर, आप बिल्‍कुल सही बोल रहे हैं। पहले मुझे भी यही लगता था कि ये दरवाजे खटखटाने का, घर घर जाकर हाथ जोड़ने का और  सेल्‍समेन जैसा काम है लेकिन जब इसकी विस्‍तार से जानकारी ली तो पता चला कि यह ऐसा कुछ नहीं है यह तो बेहद पवित्र और नैतिकता का कार्य है। इसके माध्‍यम से हम लोगों को कुछ बेचने वाला या सेल्‍समेन नहीं बनाते हैं। इस बिजनेस में हम खुद भी एक बिजनेस लीडर की शिक्षा लेते हैं और दूसरों को भी एक सुलझा हुआ सकारात्‍मक जोशीले लीडर बनने की शिक्षा देते हैं जिससे उसका पूरा नजरिया बदलकर सारी दुनिया ही उसके लिए खुशनुमा हो जाए। Situation उसको प्रभावित ना करे वह हर  हालत में अपने आप को और आगे बढ़ाता ले जा सकें। क्‍योंकि हम यहाँ पर विशाल संगठन बनाते हैं उसको नेतृत्‍व करते हैं तथा नेतृत्‍व करना सिखाते हैं ताकि जब हमारा संघठन मजबुत हो जाए तो तब हमारा बिजनेस Auto-Pilot हो जाए और हमें जिन्‍दगी की सच्‍ची और सभी की दिल की इच्‍छा समय तथा पैसे की आजादी मिल सके । हम सामान बेचने के बिजनेस में नहीं हैं, हम तो लीडर बनने-टीम बनाने और लोगों को लीडर बनाने के बिजनेस में है।
अब रहा सवाल दरवाजे खटखटाने का तो जिन्‍दगी में जीना है तो ऐसा एक भी माई का लाल नहीं है जो इस दुनिया में किसी न किसी के दरवाजे को खटखटाता ना हो और मुझे विश्‍वास है इस बिजनेस के अलावा भी हम ओर आप दरवाजा तो खटखटाते ही हैं। कभी बॉस का दरवाजा, तो कीभी डाक्‍टर का दरवाजा, तो कभी मित्र का दरवाजा, तो कभी बच्‍चो के टीचर का दरवाजा । जरा आप सोच कर बताइए नौकरी के लिए कितने दरवाजों पर में आई कम इन सर कह चुके है। अपनी लड़की या लड़के की शादी के लिए कितनों के दरवाजें खटखटायेंगे आप ? बच्‍चों को मनपंसद स्‍कूल में एडमिशन कराने के लिए कितने पापड़ बेले हैं आपने। अब आते हैं घर-घर जाने की बात पर यह बिजनेस हम साप्‍ताहिक मीटिंग एवं प्रजेन्‍टेशन के माध्‍यम से करते हैं। घर- घर जाने का सवाल ही नही उठता है, वैसे भी डायरेक्‍ट सेलिंग कंपनी सारे प्रॉडक्‍ट की घर पर ही डिलीवरी देती है।
सबसे पहली बात तो यह कि सेल्‍समेन का काम कोई लज्‍जाजनक काम नहीं है। दुनिया में सबसे ज्‍यादा बिजनेस सेल्‍स के नाम पर ही होता है, इसलिए सेल्‍समेन का काम भी उतनी ही इज्‍जत का है जितना कोई दूसरा काम। सेल्‍समेन उन लोगों से हजार गुणा अच्‍छा है जो घूस लकर काम करते हैं। मैं सेल्‍स मेन जैसा नहीं हूँ कहकर हम दो गलती एक साथ कर रहे हैं। पहली तो यह कि सेल्‍स मेन को छोटी और खराब कह रहे हैं जो कुछ बेच नहीं रहे हैं क्‍यों की हर इन्‍सान समय, सेवा या विचार देखता ही हैं। 

39. आपने कौन सा तीर मार लिया है ? आपको कितने का चैक आ रहा है ? आप कब से इस बिजनेस में हैं और आज आपको लेबल क्‍या है ?
सर, आप बिल्‍कुल सही बोल रहे हैं, मैंने भी अपनी अप लाईन से यही सवाल किए थे लेकिन मुझे एक वास्‍तविकता का पता चला कि ये बिजनेस एक अनूठा बिजनेस है इस में हम बंधे नहीं हैं। हम चोहे तो अपने स्‍पान्‍सर से ज्‍यादा तीर मार सकते हैं, ज्‍यादा सफलता ले सकते हैं, इसमें अगर हमारा स्‍पान्‍सर ने तीर भी मारा हो लेकिन हमको तो तीर मारने का मौका दे ही देता हैं और हम चाहे तो जरूर तीर मार सकते है।
वैसे भी सर, आज कल तीर मारने का जमाना चला गया अब तो मिसाईल का जमाना है इसलिए तो हम इस बिजनेस में हैं यहॉ पर हमारे जैसे या उससे भी नीचे के तबके के लोगों ने बढ़िया काम करके यहाँ से अब 40 50 हजार रूपये महीना 70—80 हजार रूपया महीना, एक लाख से दो लाख रूपया महीना भी ले रहे है। अब सवाल ये है कि आप अपने आप को कौन सी श्रेणी में लाना चाहेंगें ? क्‍योंकि दूसरे के कमीशन चेक से आपके विश्‍वास को बल तो मिलेगा लेकिन मजा तो अपने चेक लेने मे ही आएगा।

40 लोग क्‍या कहेंगे ? कहीं भी मिलने जाऐगें तो लोग मिलने से कतराएंगे।

क्‍या कहेंगे लोग सबसे बड़ा है रोग। सर आप बिल्‍कुल सही बोल रहे है में भी यही सोचता था कि इस बिजनेस में काम करूंगा तो लोग क्‍या कहेंगे लेकिन मुझे एक बात बताई गई जो मेरे अन्‍दर तक घर कर गई इजाजत हो तो शेयर करूँ ? हॉ जरूर धन्‍यवाद । सर मुझे बताया गया था कि लोग हर परिस्थिति में कहेंगे चाहे आप कुछ भी करें, आपने भगवान शिव और पार्वती की कहानी सुनी होगी- जब वे दोनों घोड़े पर चले तो लोगों ने बोला देखो इन को घोड़े पर तरहस नहीं आ रहा दोनों जवान है और घोड़े पर बैठे हैं जब पार्वती अकेली घोड़े पर बैठी तो बोला कैसी स्‍त्री है पति परमेश्‍वर हाता है उसको पैदल चला रही है और खुद घोड़े पर बैठी है। जब भगवान शिव जी अकेले घोड़े पर बैठे तो उन्‍होनें बोला देखों कैसा मर्द है नारी अबला हाती है उसको पैदल चला रहा है, खुद घोड़े पर बैठा अैर जब वे दोनों पैदल चलने लगे तो बोले देखो कैसे मूर्ख हैं साथ में घोड़ा है और दोनों पैदल चल रहे हैं, अब आप खुद ही बताएं इसके अलावा भगवान शिव और माता पार्वती क्‍या कर सकते थे, जब लोगो ने भगवान को नही छोड़ा तो हम किस खेत की मूली है।
वैसे में बताऊँ सब महान लोगों के साथ ये होता ही है क्‍योंकि आप देख सकते हैं पूरी दुनिया में सबसे ज्‍यादा अमेरिका के राष्‍ट्रपति का पुतला फूंका जाता है, देश के पी.एम.  का पुतला फूका जाता है, राज्‍य में सी. एम. का पुतला फूंका जाता है, जिले में डी.एम. का कलेक्‍टर का पुतला फूंका जाता है। लेकिन चपरासी और मजदूर का पुतला कोई नहीं फॅूकता है। इसका मतलब ऊपर उठने वाले लोगों को विरोध तो सहना ही पड़ता है और जो सह जाता है वही पाता है। ऊपर उठते हैं तो भगवान लोगों के माध्‍यम से परीक्षा तो लेगे ही। जितनी बड़ी परीक्षा उतनी बड़ी सफलता होती है वैसे हमें लोगों  की चिन्‍ता ना करके अपने कर्मों की चिन्‍ता करनी चहिए जैसे – गुटखा खाने, सिगरेट पीने, शराब पीने जुआ खेलने झुठ बोलने घूस लेने, बिना टिकट लिए प्‍लेटफार्म में घुसने, गलत साईड से गाड़ी निकालने में सरकारी गाड़ी से बच्‍चों को स्‍कूल भेजने  में इनकम टैक्‍स का झूठा रिटर्न भरने सरकारी नौकर से घर का काम कराने में घर के आगे कचरा फेंकने में साफ दीवार पर थूकने में आफिस देर से जाने और जल्‍दी घर भाग आने में गालियाँ बकने में गन्‍दे चुटकुले सुनाने में  गन्‍दे एस.एम.एस. भेजने में आदमी कहाँ सोचते हैं कि लोग क्‍या कहेगे तो फिर यहाँ क्‍यों  बहाने बाजी करते हैं।
वैसे भी किसी ने हमें समझदार कहा तो हम भूल गये। जब किसी ने कहा फस गया तो हमारे हौसले पस्‍त हो जाते हैं। ऐसी उधार की अदाओं  पर जीने से फयदा ही क्‍या है क्‍यों सर, हमें खुद के मन्‍तव्‍य पर जीना चाहिए या नहीं।
कार्य को कल पर टालना नहीं चाहिए क्‍योंकि यही एक ऐसा बिजनेस है जिससे पार्ट टाईम में भी किया जा सकता है।

41. सब सही है साहब, आपकी हर बात ठीक है पर मैं तो एक को भी राजी नही कर सकता। मेरे कहने से तो कोई नहीं आएगा।

सर, आप सही बोल रहे हैं पहले जब मैंने यह बिजनेस देखा तो मुझे भी ऐसा ही लग रहा था कि मेरे कहने से कोई नहीं आएगा लेकिन जब मेरे स्‍पान्‍सर ने बताया कि हमारे दिमाग में ऐसा क्यों आ रहा है कि हम किसी को राजी नहीं कर पाऐंगे और हमारे कहने से कोई नही आएगा। तो इसका मतलब है यहाँ कि हमारा आत्‍मविश्‍वास बहुत कम है और हमारी समाज में कोई सामाजिक प्रतिष्‍ठा नहीं है। सबसे पहले तो हमें अपने आत्‍मविश्‍वास को जाग्रत करना होगा क्‍योंकि बिना आत्‍मविश्‍वास के आदमी कहीं भी कामयाब नहीं हो पाता हैं। दूसरी बात हमारी सामाजिक प्रतिष्‍ठा भी अच्‍छी होनी चाहिए हमें ऐसे संगठन से जुड़ना चाहिए जहाँ हमें सम्‍मान भी मिले। और यह बिजनेस इन दोनों चीजों के अलावा कई अन्‍य चीजें भी दिलाने में सक्षम है। दूसरा इस बिजनेस में हमें राजी करना पड़ेगा ऐसा कुछ नहीं है। यह तो जिन्‍दगी बदलने वाला अवसर हैं जिसकी जानकारी कुछ लोगों को देनी होती है। जानकारी लेने के बाद इच्‍छुक और योग्‍य प्रॉस्‍पेक्‍ट खुद ही आपके साथ जुड़ने के लिए प्रेरित हो जाएगा और जो इच्‍छुक नहीं है उसको हमें राजी करने की जरूरत नहीं है। दूसरा इस बिजनेस में सब लोग प्रॉडक्‍ट प्रमोट भी नही कर सकते है यहाँ 10-7-4-1 रूल कार्य करता है, इसलिए हमें चिन्‍ता करने की जरूरत नही है और न ही खुद को Under Estimate करने की। शुरूआत में मुझे भी लग की पता नहीं टीम बना पाऊॅगा या नहीं लेकिन आज मुझे ये कहते हुए। फक्र होता है 2 की नहीं 20 की नहीं 200 की नहीं, मेरी टीम लगातार बढ़ ही रही है। वैसे हमारे अपलाइन ऐसे हैं जिनकी टीम हजारों लाखों की हैं तो हमारी और आपकी क्‍यों नही हो सकती।

42. ये टोपी पहनाने का धन्‍धा है, आपको किसी ने पहना दी तो हमको पहनाने चले आए।

आप बिल्‍कुल सही बोल रहे हैं, ये टोपी पहनाने का ही बिजनेस है लेकिन ये टोपी पहनकर बहुत सारे लोगों ने अपनी और अपने परिवार की जिन्‍दगी बदली है, बॉस से छुटकारा पाया है देश-विदेश की यात्रा की अपने नाम के साथ करोड़पति लगाया है, साईकिल से कार तक पहुँचे हैं, ये ऐसी टोपी है जो ठंड गरमी और बरसात से बचने के काम आती है, ये मंच माईक और माला भी दिलाती हैं, इस टोपी को पहनने के बाद लोग ज्‍यादा स्‍मार्ट और ज्‍यादा आत्‍मविश्‍वासी बन जाते हैं, इस टोपी को पहनकर बहुत लोग के परिवार में खुशियॉ आई हैं। इस टोपी को पहनने से परिवार में सुकून मिला है। ऐसी टोपी को मैं तो पहनूँगा ही लेकिन ये खुशियों भरी टोपी पूरी दुनिया को पहनाने के लिए तैयार हूँ। मुझे लगता है आपको भी इसे पहनने में देर नहीं करनी चाहिए।

43. मान लीजिए कि मैंने किसी को फँसा कर मेम्‍बर बना ही लिया पर दो आगे मेम्‍बर नहीं बना पाया तो वो मुझे गाली देगा कि नहीं मुझे उसकी आह लगेगी कि नहीं ?

सर, आप बिल्‍कुल सही बोल रहे है, पहले पहल मेरे दिमाग में भी यह बात आई थी लेकिन इस बिजनेस को जब मैंने गहराई से समझा तो पता चला कि इस बिजनेस में फँसना, फँसना या गाली देना यह आह लागने जैसेी कोई बात ही नहीं है। क्‍योंकि यहाँ पर हम किसी को मेम्‍बर नहीं बनाते हम तो इस बिजनेस में कुछ ब्रांडेड प्रॉडक्‍ट को शेयर करते हैं तथा उन प्रॉडक्‍ट को लेने के बाद आगे रिकमण्‍ड करके एक संगठन बनाने पर, उसके प्‍लान में बताए गए आधार पर एक निश्चित कमीशन मिलता है। अब इस परिस्थिति में उस आदमी को हर हालत में यह तो फायदा होगा या बहुत बड़ा फायदा होगा। अगर उसने आगे टीम नही बनाई संगठन नहीं बनाया तो उसको पैसे के बदले में प्रॉडक्‍ट या बिमा पॉलिसी का फयदा तो मिलेगा ही मिलेगा। लेकिन जरा सोचिए अगर उसने कुछ मेहनत करके टीम वर्क में मिलकर अपना संगठन बना लिया तो उसको कभी न रूकने वाली आमदनी पीढ़ी दर पीढ़ी मिलती रहेगी इसलिए हम कहते हैं या तो फायदा होगा या बहुत बड़ा फायदा होगा।
वैसे यहाँ यह काम करने के पैसे मिलते हैं और कमीशन मिलता है ये कोई नई बात तो नहीं है हर जगह पर प्रॉडक्‍ट खरीदने के पैसे लगते हैं और हर जगह काम करने के पैसे मिलते हैं तो फिर यहाँ पर क्‍या कोई बाबा जी भण्‍डारा है कोई काम भी नहीं  करेगा और गाली देगा और आपको आहे लगेगी । इस बात की कोई तुक नहीं है। ये महज एक भ्रम है और इस बिजनेस को नहीं समझना अज्ञानता का उदाहरण है। जो इस बिजनेस को समझ लेगा वह कभी भी ऐसी बातें नहीं करेगा । मैं जरूर सलाह देना चाहूँगा कि आप कुछ मीटिंग और प्‍लान में जाकर अच्‍छे से समझने की कोशिश करें और इस नायाब बिजनेस का फायदा उठाए।

44. मेरे सर्किल में कोई ऐसा नहीं है, जो इसे करना चाहेगा ?

आप बिल्‍कुल सही बोल रहे हैं। मुझे भी ऐसा लगा था कि मेरा कोई ऐसा सार्किल नहीं है लेकिन जब पता चला कि इस बिजनेस को करने के लिए कोई जरूरी नही है कि आप केवल अपने सार्किल में ही कर सकते हैं। यही एक ऐसा बिजनेस है जिसे हम पूरे हिन्‍दुस्‍तान में कहीं भी कर सकते हैं और हम प्रतिदिन अपना सर्किल नया बना सकते हैं। इसलिए चिन्‍ता नहीं करना, आप करने की ठाने तो रास्‍ते अपने आप दिखाई देने लग जाऐंगे।

45. मैं तो मेम्‍बर बन जाऊगाँ लेकिन आगे मेम्‍बर नहीं बना पाऊंगा ?

आप बिल्‍कुल सही बोल रहे हैं, शुरूआत में मुझे भी ऐसा प्रतीत हुआ था लेकिन जब मुझे पूरी जानकारी मिली तो पता चला कि इस बिजनेस में हम मेम्‍बर बनाने वाली स्‍कीम में नहीं है। ये तो टीम बनाने (संगठन बानने का) का सुअवसर है। ये संगठन बनाने का कार्य, अमीर आदमी बनने के लिए अति आवश्‍यक है। क्‍योंकि जितनी बड़ी टीम, उतनी बड़ी सफलता होती है।
दूसरी बात यह है कि जब हमारे जैसे कलेवर वाले दूसरे लोग, यह बिजनेस कर सकते है तो हम क्‍यों नही, वैसे भी हमारे अन्‍दर अथाह शक्तियाँ छुपी हुई हैं जिन्‍हें जाग्रत करके कुछ भी कर सकते हैं फिर ये बिजनेस तो एक साधारण कार्य है जिसमें कोई रिस्‍क भी नहीं है।

46. मैंने ज्‍वाईन कर लिया और प्रॉडक्‍ट भी खरीद लिया लेकिन अभी टूल्‍स तो फ्रि मिलने चाहिये।

सर, आपका सवाल बिल्‍कुल सही है। जब मैने ज्‍वाईन किया था तो यही सवाल मेरे दिमाग में भी आया था और मैंने सोचा था कि ये सब प्‍लान Presentation Folder पुस्‍तक तथा इनकी जानकारी की CD(Audio/Video)  इत्‍यादी या तो हमें कम्‍पनी की तरफ से मिलनी चाहिए या जो हमारा स्‍पांसर है उससे मिलनी चाहिए, लेकिन मुझे उस समय यह नहीं मालुम था कि हम बिजनेस में कम्‍पनी के नौकर नहीं है, हम तो यहाँ एक I.B.O (Independent Business Owner) स्‍वतन्‍त्र व्‍यापार के मालिक की हैसियत से एक (Associate Distributor) हैं।
अगर कम्‍पनी हमें Tools, Presentation, Folder, Books इत्‍यादि देगी तो (मालिक) स्‍वतन्‍त्र व्‍यापारी कहाँ रहे, हम तो नौकर की श्रेणी में आ जाऐंगे। और हम इस बिजनेस में आकर बिल्‍कुल नहीं चाहते कि यहाँ पर भी हमारा कोई बॉस या मालिक हो। इसलिए मालिक होने के नाते अपने Tools के पैसे देते हैं उसका फयदा भी उठाते हैं। लेकिन जहाँ हमें कोई फ्री की सामग्री मिलती है वह अनायास ही पड़ी रहती है और किसीने खूब कहा है कि जहाँ जाता है धन वही जाता है मन।
वैसे ये सभी Tools पुस्‍तक, CD इत्‍यादि खरीदने के लिए हम स्‍वतन्‍त्र है, हम चाहे तो खरीदे, चाहे तो बिल्‍कुल ना खरीदें। लेकिन हमें मालूम नहीं इन Tools की छोटी सी कीमत देकर हम ढ़ेर सारा फायदा उठाते हैं, मैं तो यह कहुगाँ कि Tools पर होने वाला Expense खर्च नहीं है  यह  तो एक समझदारी भरा Investment है जिससे निश्चित फयदा मिलता है, बस हमें लेने के लिए उन्‍हें प्रयोग करना है वैसे भी हम अपनी जिन्‍दगी को Fast स्‍पीड देने के लिए जिन Tools का प्रयोग करते हैं वे हमारी Speed बढ़ाकर हमरा समय बचाते हैं जैसे – Bike, Train, Car, Aeroplane इत्‍यादि । ऐसे ही हम System द्वारा अनुमोदित Tools के माध्‍यम से अपने बिजनेस की रफ्‍तार बढ़ा सकते हैं और एक Log id पर लाखों रूपये महीने तक कमा सकते हैं। क्‍योंकि जितना हम Late Capping  पर पहुचेंगे (-------लाख प्रति सप्‍ताह) उतना ही हमारा नुकसान है इसलिए Tools को लेकर तथा Promote करके हमें कम समय में ज्‍यादा सफलता लेने के अवसर को तुरन्‍त पकड़ना चाहिए।

47. इस बिजनेस को किसे करना चाहिए और किसको नहीं करना चाहिए ?

सर, जो इन्‍सान महत्‍वकांक्षी है और अपनी काबिलियत का लोहा मनवाना चाहता है यह अगर कोई मौका मिले तो कुछ करके दिखाना चाहता है तथा अपने जीवन स्‍तर को ऊपर उठाना चाहता है उसको ये बिजनेस जरूर करना चाहिए। और  जिस आदमी में ऊपर उठने की कोई तम्‍मना नहीं है और लो प्रोफाइल में ही अपनी जिन्‍दगी गुजारना चाहता है तो उसे कोई जरूरत नहीं उसे नहीं करना चाहिए।

48. मैंने दरअसल सुना है कि बिजनेस में चालाकी चाहिए होती है और कदम–कदम पर झूठ बोलना पड़ता है।

इस बिजनेस में चालाकी और झूठन हीं चलते हैं क्‍योकि यहाँ पर जीवन भरके सम्‍बन्‍ध बनाने पड़ते हैं और लगातार एक दूसरे के साथ रहकर काम है और आप समझ सकते है कि झूठ और चालाकी के दम पर लम्‍बे समय तक सम्‍बन्‍ध या रिश्‍ते नहीं चलते वे तो सच्‍चाई और एक दूसरे पर विश्‍वास से चलते हैं।
दूसरी बात यह है, कि हम इस बिजनेस को एक आध्‍यात्मिक और दिव्‍य बिजनेस की झलक में देखते हैं। यहँ पर हमेशा सकारात्‍मक सोचना स्‍वयं को आगे बढ़ाना और दूसरों को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना तथा सब भलें में ही अपना भला होता है, ये बिजनेस भगवान के बनाये आध्‍यत्मिक रास्‍ते पर चलकर ही मजबूत बन सकता है।
इस बिजनेस में हमेशा सिखाया जाता है कि भगवान में विश्‍वास रखों आप जरूर सफल होंगे, परिवार के साथ ऐसा व्‍यवहार करो जैसा हम अपने लिए चाहते हैं और जो इन्‍सान वर्तमान में कार्य कर रहा है उसे इमानदारी से करें क्‍योंकि जो इन्‍सान अपने वर्तमान में अच्‍छा है वह यहांँ पर इस बिजनेस में भी अच्‍छा ही रहेगा।

49. मैं तो पहले से ही नौकरी या बिजनेस कर रहा हूँ, मुझे इस बिजनेस को करने की क्‍या जरूरत है? हम अपने में सन्‍तुष्‍ट है, हमको ज्‍यादा पैसों का लालच नहीं है।

सर, आप बिल्‍कुल सही बोल रहे हैं, आपको ही नहीं जब मैने इस बिजनेस को देखा था मुझे भी ऐसा ही लगा था कि नौकरी वाले को इसको करने की क्‍या जरूरत है। लेकिन अब बाद में सच्‍चई का पता चला तो महसूस किया कि नौकरी वाले को या Settled बन्‍दे को ही ज्‍यादा जरूरत होती है और जब उसकी नौकरी या खुद का काम अच्‍छा चल रहा है तब ज्‍यादा जरूरत है। क्‍योंकि कुआँ तभी खोदा जाता है जब बहुत प्‍यास ना लगी हो ? क्‍योंकि जब प्‍यास लगी होगी तब तो आप कुआँ खोद ही नहीं पऐंगे। इसलिए इस बिजनेस को करने की अभी ज्‍यादा जरूरत है जब नौकरी व व्‍यवसाय ठीक चल रहा है। अगर सचमुच में पता ही करना है कि मुझे इस बिजनेस की जरूरत है या नहीं तो हमें एक Exercise की जरूर करनी चाहिए और वह Exercise है परिवार के साथ अपना ग्रुप फोटो देखे और अपनी फोटो पर क्रास लगा दें। अगर आपके न रहने से आपके परिवार का जीवन शैली वही रहती  है, तो आपको इस बिजनेस की जरूरत नहीं है। वैसे भी जो हम आज ले पा रहे है चाहे नौकरी से या अपने व्‍यवसाय से उसे सन्‍तुष्‍ट होना तो प्रकृति और समाज की प्रोग्रेस को रोकना जैसा है। आज भी बड़े–बड़े धन कुबेर अपने कारोबार को बढ़ाने में लगे हैं। अगर उनको आगे बढ़ने की जरूरत है  तो हम और आपको क्‍यों नहीं है ? वैसे भी हमें रूकना नहीं चाहिए, थकना नही चाहिए, क्‍योकि रूका हुआ इन्‍सान और ठहरा हुआ पानी देानेा सड़ जाते हैं। हमें तो नदी की अविरल धारा की तरह लगातार बहना चाहिए।
50. आपने तो, सर, पाँच मिनट में हमें करोड़पति बनने का रास्‍ता बता दिया। क्‍या अमीर बनना इतना आसान काम है ?

आप बिल्‍कुल सही कर रहे है। लेकिन सर, आप ये बताए गरीबी में रहना कौन सा आसान है (वह भी इस महंगाई के जमाने में) नि:संदेह इस बिजनेस को करने में जो कुछ भी चैलेंज आते हैं वे अस्‍थाई होते हैं लेकिन इसमें  काम न करने से जो समस्‍या आएगी वे तो स्‍थाई रहेंगी । अनुशासन और पछतावा दोनों की कष्‍टकारक हैं। ज्‍यादा लोगों को इन में से एक को चुनना होता है। जरा सोचिए इन दोनो में से कौन ज्‍यादा तकलीफ देह है।

51. इसमें ज्‍वाईनिंग महॅगी हैं। प्रोडक्‍ट भी महंगे हैं और किसी काम के नहीं हैं। हम नही खरीद सकते ।

अगर ----- हजार से ------ हजार आपके लिए बड़ी  रकम है तो आपके  पैसा कमाने के सिस्‍टम में कुछ कमी है फिर तो आपको जरूर बन्‍दोबस्‍त करके ज्‍वाईन करना चाहिए। प्रोडक्‍ट महंगे नहीं होती हैं खरीदने वाले की जेब का साईज छोटा या बड़ा  होता है। हवाई जहाज की बजाए रेल में  सस्‍ता किराया होता है लेकिन फिर जिन लोगों की जेब मे दम होता हे वे लोग हवाई जहाज से यात्रा करना पसंद करते हैं और वह भी उन्‍हें महँगा नहीं लगता बल्कि जायज लगता है। अब रही बात, प्रोडक्‍ट की इन प्रोडक्‍ट को काम में लेना या प्रयोग करना तो हमारे पर निर्भर करता है लेकिन मैं एक चीज का जरूर वादा करता हूँ कि प्रोडेक्‍ट आपके काम के हो या नही हो लेकिन आपको काम का आदमी जरूर बना सकते है।

52. मैं तो समझ गया लेकिन लोगों का मुझे कैसे पता चलेगा वह इसमें रूचि रखता हैं या नहीं मैं कैसे पहचानुगाँ और कोई उल्‍टे दिमाग का मिल गया तो कैसे डील करूंगा ?

आप बिल्‍कुल सही कर रहे हैं जब, मैने शुरूआत की तब मेरे दिमाग में भी यही सवाल आ रहे थे। लेकिन जब मेरे स्‍पान्‍सर ने मुझे बताया तो पता चला कि इस बिजनेस में बहुत सारे फायदे है जैसे:-  
  •       अतिरिक्‍त आमदनी   
  •       आर्थिक स्‍वतंत्रता     
  •       स्‍वयं का व्‍यवसाय   
  •       खली  समय का सदुपयोग    
  •       समय और धन की स्‍वतन्‍त्रता  
  •       व्‍यक्तित्‍व का विकास    
  •       दूसरों की मदद करना     
  •       नए–नए लोगों से मिलना      
  •       अगली पीढ़ी के लिए जायदाद छोड़ना । 

इस सूची को याद रखिए । आप भी सूची में बताए गए एक फयदे की वजह से इस व्‍यवसाय में है और जिससे भी आप बात करेंगे वो इस सूची में दर्शाए में से एक या अधिक की वजह से इस व्‍यवसाय में शामिल होना चाहेगा पर आपके शामिल होने की वजह ही दूसरों की वजह होगी, यह सोचना गलत है अत: आपको अपने मित्र या परिचित से शामिल होने की वजह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि उनको इस व्‍यवसाय में क्‍या अपील करेगा। दूसरों की रूचि जानने के लिए उनसे सामान्‍य तरीके से यह सवाल पूछा जा सका है कि क्‍या आपको मालूम है कि लोग इस व्‍यवसय को क्‍यों अपनाते हैं ? जवाब में वो कुछ भी कहे आप सुनते रहिए और बाद में आप यह सूची दोहरा दीजिए, क्‍योकि आपको मालूम है कि लोग इस व्‍यवसाय को क्‍यों अपनाते हैं ? जवाब में वो कुछ भी कहे आप सुनते रहिए और बाद में आप यह सूची दोहरा दीजिए, क्‍योंकि आपको यह सूचि एकदम रटी हुई है उसके बाद आप यह पूछ सकते है कि आपको इन फायदे में से सबसे ज्‍यादा क्‍या अपील करता है, वो जो भी फायदा गिनाता है तो आप अलग सवाल पूछ सकते हैं कि वो यह फायदा पाने लिये क्‍या कर सकता है ? आप उसे आश्‍वासन दे सकते हैं कि वह यहाँ से अपनी इच्‍छा के अनुसार सब चीजे पा सकता है। जो वो पाना चाहता हैं। अगर आपका पाला ऐसे आदमी से पड़ जाता है जिसको  इस सूची में से कोई फायदा अपील नहीं करता तो उस पत्‍थर  दिमाग का नाम अपनी पेंडिंग लिस्‍ट में डाल दीजिए और दूसरे व्‍यक्ति से सम्‍पर्क करना शुरू कीजिए। हर बिजनेस की तरह  इस बिजनेस में भी दो-चार पत्‍थर दिमाग लोगों से आमना-सामना हो ही जाता है आप चाहे स्‍कूल खोले या अस्‍पताल चाहे बिजनेस करे या नौकरी, पत्‍थर दिमाग लोगों से तो पाला पड़ेगा ही। कई लोगों की तो शादी ही पत्‍थर दिमाग से हो जाती है, वो भी आखिर किसी न किसी तरह उससे निपटते ही हैं। आप बिल्‍कुल निराश न हो और अगले आदमी से बात करे।

53. मेरे सपने बहुत बड़े हैं, मैं सफल होना तो चाहता हूँ कोई अगर हमारी कम्‍पनी के बारे में कहता है कि ये लोगों को बेवकुफ बनाने की स्‍कीम बताने पर तुल जाते हैं तो मुझे अपने आप पर काबू नही होता।

आप बिल्‍कुल सही कह रहे हैं मैं आपकी भवनाओं को अच्‍छी तरह से समझ सकता हूँ, इस व्‍यवसाय की एक ही चुनौती (Challenge) है कि आप लोगों की नकारात्‍मक प्रतिक्रिया के प्रति संवेदनशील होने की बजाय संवेदन हीन होना सीख जाए। समाज में नकरात्‍मक लोगों की भरमार है। लोगों का अहं इस बात से बड़ा सन्‍तुष्‍ट होता है जब वे किसी बात के लिए न कहते हैं, आपन भी महसुस किया होगा कि जब कोई किसी बात के लिए ना कहता है तो जोर देकर कहता है, पर जब हाँ कहता है तो मरी–मरी सी आवाज में कहता है। यह मनोवैज्ञानिक तथ्‍य है। दरअसल ना कहते वक्‍त आदमी ये सोचता है कि वो कुछ चीज है और उसे ना कहने से संतुष्टि मिलती है।  अत: ना कहने पर वो तो विजेता का अनुभव करता है पर ना सुनने वाला पराजित अनुभव करता है । यह पराजय का अनुभव बहुत से लोगों को इस बिजनेस में आने से रोक देता है। या बिजनेस से भागने को मजबूर कर देता है। पर पराजय का ये अनुभव धोखा है वस्‍तुत: पराजय या निराशा जैसी कोई बात इसमें हैं ही नहीं कि सब कुछ आपके हिसाब  से ही चलेगा तो अप खुश होंगे। ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि लोग अपना निर्णय आपकी योजना के अनुसार ले। आपको ये सीखना पड़ेगा कि महौल को अपने हिसाब से ढालना असंभव है, पर माहौल के हिसाब से अपने को को ढाल लेना बहुत आसान है अत: आप फंक्‍शन में समय–समय पर जाया करें, ताकि आपको यह एहसास होता रहे कि जो आपके साथ हो रहा है वह अनोखा नहीं हैं और जो लोग सफल हुए हैं वे सभी इस रास्‍ते से गुजरे हैं। चूंकि आप के साथ भी वही हो रहा है जो सफल लोगों के साथ होता है। अत आप ये निष्‍कर्ष ले सकते हैं कि आप भी सफलता के राह पर हैं। फंक्‍शन में जाने से, कैसेट सुनने से तथा किताबें पढ़ने से आपको वो अतिरिक्‍त्‍ उर्जा मिलती रहती है, जो इस बिजनेस को चलाती है। अत: जब भी आपको उत्‍साह और उर्जा की कमी महसूस हो तब आपको फंक्‍शन में जाना है, कैसेट सुनना है और किताबें पढना है। और जैसे आपने बताया आपके सपने बड़े है जो बहुत अच्‍छी बात है लेकिन हमें ये भी समझना चाहिए सपने देखने वाले चार प्रकार के होते है।   
1. ये अपने सपने को पूरा करने के लिए कुछ भी हाथ पैर नहीं हिलाते हैं। वे मरे हुए लोग होते हैं उनका इनका अंतिम संस्‍कार होना बाकी  हैं। अगर ये कुएं में गिर जाएं तो ये बिना हाथ पैर हिलाए और बिना चिल्‍लाए ही मर जाऐंगे। यह संख्‍या में लगभग 40% होते हैं।       
2. कुछ लोग सपने तो देखते हैं पर अपने दम पर कभी उनको पूरा करने का प्रयास नहीं  करते। ये दूसरों की तारीफ कर यह सूकून हासिल करते हैं कि अगर हम भी उसकी जगह होते तो वैसे ही सफल हो सकते थे। वे अनुयायी होते हैं और संतोषी सदा सुखी का पहाड़ा पढ़ते देखे जाते हैं। ये स्‍वभावत: आलसी और डरपोक हाते हैं, पर अपने आलस्‍य को संतोष का नाम देते हैं और अपने डर को समय की कमी के बहाने छुपाने में माहिर होते हैं। अगर ये कुएं में गिर जाए तो यह हाथ–पाँव मारेंगे और चिलाएंगे और अगर बच गए तो ये भले ही प्‍यासे मर जाएं पर जिन्‍दगी भर कुएँ के पास भी ने फटकेंगे और अपने आसपास के सभी लोगों को कुएं से दूर रहने की सलाह देंगे । ये करीब 30% होते हैं।  
3. कुछ लोग सपने देखते है ओर उसका पीछा करते हैं। ये योजनाबद्ध तरीके से काम करते हैं। और सपने साकार करने की कीमत चुकाते है। ये सफल लोग हैं, ये स्‍वस्‍थ एवं प्रसन्‍नचित रहते हैं। ये हर अवसर और चुनौती का उपयोग अपने हित में करने में माहिर होते हैं। अगर ये कुंए में गिर जाएं तो ये हाथ–पॉव मारेंगे और चिल्‍ला–चिल्‍ला कर साबुन मागेंगे और साबुन मिलने पर वहाँ से नहाकर निकलेंगे। ये लगभग 20% की तादाद में पाये जाते हैं।    
4. कुछ लोग सपने देखते हैं, उनका पीछा करते हैं, और सही सपना देखने में दूसरों की मदद करते है। ये लीडर्स हैं।  ये लगभग दस प्रतिशत की तादाद में  मिलते हैं पर अगर आपको कभी मिल जाए तो इनकी संगत फायदेमंद होती है। अगर ये कुएं में गिर जाएँ तो ये हाथ – पाँव मारेंगे और चिल्‍ला– चिल्‍ला कर साबुन मागेंगे और साबुन मिलने पर वहाँ से नहाकर निकालेंगे और कुंए के चारों तरफ दीवार बनवाने में जुट जाऐगें ताकि कोई भी दूसरा उसमें न गिरे। ऊपर के दो श्रेणियों के 70% लोगों को ये अजीव नजर आते हैं। इन्‍हें लोग सपनां का सौदागर कहकर मजाक उड़ाते हैं  पर ये उनकी परवाह नहीं करते हैं क्‍योंकि वह उनकी श्रेणी जान चुके है।
  
54. इस बात की क्‍या गारन्‍टी है कि डायरेक्‍ट सेलिंग बिजनेस का हर स्‍वतन्‍त्र उद्यमी सफल हो जाएगा ?

लोगों के मन में ऐसे सवाल आना स्‍वभाविक हैं इसलिए मुझे भी ऐसा ही लगा था लेकिन बाद पता चला कि गारन्‍टी देने वाले आदमी की खुद की गारन्‍टी नहीं होती तो वह बिजनेस की क्‍या गारन्‍टी दे सकता है। इस मामले में हम स्‍पष्‍ट कहना चाहेंगे कि जो सफलता के लिए तैयार होगे उन्‍ही को सफलता मिलेगी और हर व्‍यक्ति इसे प्राप्‍त कर सकता है।
हर वह आदमी जो सफलता चहता है उसे पहले इसके लिए तैयार होना होगा। अपना दृष्टिकोण बदलना होगा फिर अवसरों को देखना होगा और उनका प्रयोग करना प्रारम्‍भ करना होगा । और विश्‍वास करना होगा कि वह सफल हो सकता है क्‍योंकि वह कोई ऐसा कार्य नहीं करने जा रहा है जो पहले किसी ने नहीं किया हो। वह तो वही कार्य करने जा रहा है जिस कार्य को पहले ही हजारों लोग कर चुके हैं और लगातार कर रहे हैं, यहॉ पर कम बुद्धि के वजह से कोई सफल नहीं होता है लेकिन अति बुद्धिमानी से जरूर हो सकता है।

55. हम आम करियर या पारम्‍परिक व्‍यवसाय में रहते हुए इस व्‍यवसाय को चलाने में किस तरह तालमेल बैठा सकते है ?

आप बिल्‍कुल सही कर रहे हैं। मुझे भी ऐसा ही लगा था लेकिन जब मेरे स्‍पांसर ने बताया कि वह अपने समय का प्रयोग करने में कितना योग्‍य होता है जो हम सभी को समय समान मात्रा मे दिया गया है। इस व्‍यवसाय की प्रकृति ही ऐसी है कि व्‍यक्ति अपनी नौकरी करने के साथ-साथ स्‍वतंत्र उद्यमियों को नेटवर्क विकसित कर सकता है। प्रारंभ में आमदनी इतनी अधिक नहीं होती है कि लोग अपनी पूर्ण-कालिक नौकरी से मिलने वाली आमदनी छोड़ सकें हाँलाकि कई बार ऐसा भी होता हैं। लेकिन आम तौर पर पहले महीने में नहीं होता। नेटवर्क के विकास की प्रारंभिक अवस्‍थाओं में यह व्‍यवसाय अक्‍सर अतिरिक्‍त आय का स्‍त्रोत होता है, जिसमें आगे चलकर बहुत बड़े असीमित लाभ  की संभावनांए होती है। जो उद्यमी लगन और समर्पण से  मेहनत करते है, स्‍पष्‍ट हैं उनके विकास की गति अधिक तेज होती है। जब अच्‍छी तरह विकसित नेटवर्क बना लें और नौकरी से ज्‍यादा आमदनी प्राप्‍त करने लगे तो उसके बाद वह नौकरी या पारंपरिक व्‍यवसाय से इस्‍तीफा दे सकते हैं।

56. क्‍या मैं ये बिजनेस कर सकता हूँ ? मेरा बिजनेस करने का नेचर ही नहीं है।

जी आप बिल्‍कुल कर सकते हैं। ये जो बिजनेस है केवल तीन काम करने का है। Select the Product, use the product, promote the product इस प्रकार का कार्य तो हम अनजाने में नींद मे सोए हुए भी कर रहे होते हैं। बिना सोच–समझे बिल्‍कुल ही स्‍वाभाविक और स्‍वचालित ढ़ंग से इतना ही नही, आप यह व्‍यवसाय उन बहुत से लोगों के लिए कर रहे हैं जिनसे आप मिले भी नहीं  हैं। जी हाँ यह आप ही हैं। बहुत सी चीजों के प्रिय उपभोक्‍ता । आप जो भी प्रयोग करते हैं तो किसी  न किसी का व्‍यवसाय तो बढ़ाते ही हैं। हम सोते समय पलंग, चादर, पाजामे का प्रयोग करते हैं तो किसी न किसी का व्‍यवसाय बढ़ाते हैं। सुबह उठने से लेकर सोने तक हम ढ़ेर सारे प्रॉडक्‍ट प्रयोग कर के कसी न किसी का बिजनेस बढ़ा रहे है़। जब अनजाने में हम दूसरों का बिजनेस बढ़ाते हैं तो क्‍यो न खुद का बिजनेस भी बढ़ाया जाए।

57. मैं तो ज्‍यादा पढ़ा लिखा नहीं हूँ, क्‍या मैं ये बिजनेस कर पाऊँगा ?

आपका सवाल जायज है पहले मैं भी यही समझता था कि इस बिजनेस को करने के लिए हमें पहले से बहुत शिक्षित या क्‍वालीफाईड होने की जरूरत है लेकिन बाद में पता चला कि ऐसा कुछ नहीं है यह साधारण 8-10 क्‍लास पढ़े व्‍यक्ति से लेकर पी.एच.डी. तक सभी लोग आसानी से कर सकते हैं बस केवल इच्‍छा शक्ति होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर हम इस पुस्‍तक  में अचीवर गैलरी देख सकते हैं जिनमें से 40% लोग ऐसे है जो स्‍नातक या बड़ी डिग्री धारक नहीं हैं। वैसे भी पूरी दुनिया या टाप अमीरों का सर्वें करते हैं तो पता चलता है कि 20% से ज्‍यादा धन कुबेर केवल प्राथमिक या माध्‍यमिक लेवल तक पढ़े थे और फिर भी विश्‍व की जानी मानी हस्तियॉ हैं। पूरी दुनिया में 10 साल तक सबसे अमीर रहने वाले मि. बिलगेट्स को तो जनते ही है जो पढ़ाई बीच में छोड चुके थे। इसके इलावा मैं आपके याद दिलाना चाहूंगा कि लाभ में सहभागी बनने के लिए यह आवश्‍यक नहीं है कि आप किसी खोज अविष्‍कार या विचार के रचयिता हो । उदाहरण के लिए आमा कैंडलर ने कोका–कोला का फॉर्मूला स्‍वयं नही सोचा था। उन्‍होंने यह फार्मूला खरीदा था और इसे लोकप्रिय बनाने में सफल हुए थे।

v  हेनरी फोर्ड ने कार इंजन का अविष्‍कार नही किया था, लेकिन वे मोटर उद्योग के पितामह बन गए और उन्‍होंने बहुत धन कमाया।
v  रे क्राक ने बर्गर बेचकर बहुत सी संपति इकट्ठी की, हाँलाकि उन्‍होने मैकाडानल्‍ड भाईयों से बर्गर की बिक्री और उत्‍पादन का लाइसेंस ही खरीदा था।
v  बिल गेट्स ने पर्सनल कम्‍प्‍यूटर का अविष्‍कार नहीं किया था। यह अविष्‍कर तो स्‍टीव जॉब्‍स और स्‍टीफन वॉज्नियाक ने किया था। लेकिन इस उद्योग की प्रसिद्धि और अपार सम्‍पति गेट्स को मिली।
हाँ, इसमें कोई संदेह नहीं कि अगर हम आधुनिक प्रगति से कोई लाभ कमाना चाहते हैं, तो हमें अपनी आँख कान खुले रखने की जरूरत है। और लगातार हो रहे नए विकास पर पैनी दृष्टि रखने की आवश्‍यकता है।


58. कितना अच्‍छा होता अगर एम.एल.एम. कम्‍पनी. प्‍लान फोल्‍डर. किताब, ब्रोशर्स, विडियो, ऑडियो, टेप्‍स और डीवीडी इत्‍यादी लोगों को फ्री में दे दे।

आप बिल्‍कुल सही बोल रहे है मुझे भी शुरूआत में ऐसा ही लगा था लेकिन बाद में मुझे पता चला कि स्‍वतंत्र उद्यमी का ओहदा बदलकर निर्भर तनख्‍वाह वाले कर्मचारी का हो जाएगा । ये फिर दोबारा नौकर और मालिक वाली बात आ जाएगी। और कल्‍पना करें, हमारे ग्रेट अपलाईन लीडर संजय जैन जी अगर उस समय फ्री की किताब आदि लेने के चक्‍कर में रहते तो आज कुछ ही सालो में कई करोड़ो की आमदनी ले पाते क्‍या? बिल्‍कुल नहीं, नौकर ही बनकर रह जाते । इसलिए हमारी कम्‍पनी धन्‍य है जो हमें फ्री में ऊपर लिखित चीजें ना देकर हमें एक स्‍वतंत्र उद्यमी को ओहदा प्रदान कर रही है जो हमारा जनमसिद्ध अधिकार है। शरीर से एक कांटा निकालना है तो दूसरा डालना पड़ता है वैसे बड़ी रकम कमाना है तो छोटा सा निवेश तो करना ही चाहए ?

59. मुझे डर है कि मेरा अपने परिवार के साथ संपंर्क समाप्‍त हो जाएगा और मैं इसे नजर अंदाज करने लगूंगा।

क्‍या आप मुझे यह बताने की कोशिश कर रहे है‍ कि आप नौकरी करने जाते समय अपनी पत्नि (पति) और बच्‍चों को साथ लेकर जाते हैं ? उन्‍हें सारे दिन अपनी गोद में  बिठाते हैं और उन्‍हें लौरिया सुनाते हैं ?
मैं एम एल एम तंत्र में काम करने वाले कई परिवारों को जानता हूँ, जिसके पारिवारक संबंध एम.एल.एम के कारण बेहतर हो गए हैं। उनके संबंधों में दयालुता, खुशी और प्रेम दोबारा लौट आया है। 
60. मैं ऐसा क्‍या करूँ जो मुझे सफलता दिला दे क्‍योंकि समय तो थोड़ा ही है ?

क्या आप बॉस बनने में सक्षम है? क्‍या अप आत्‍म–अनुशासन उत्‍पन्‍न कर सकते हैं? क्‍या आप नेटवर्क में अपने काम संबंधी सभी निर्णयों और कार्यों में दृढ़ हो सकते हैं? यदि जबाव हाँ है, तो बहुत बढ़िया हैं, यह व्‍यवसाय आप ही के लिए है।
लेकिन सचमुच अपना बॉस बनना इतना आसान नहीं है। जीवन भर किसी ने हमेशा आपके लिए निर्णय लिए हैं और जिम्‍मेदारी ली है है। सबसे पहले तो वो आपके माता पिता थे, बाद में आपके शिक्षक, फिर आपके बॉस और फिर ससुराल वाले और अब अचानक आपको सारा बोझ स्‍वयं उठाना होगा। और हाँ, क्‍योकि यह आपका जीवन है। आपने अपना व्‍यवसाय आरंभ करने के बारे में क्‍यों सोचा ? या स्‍वतंत्र बनने के लिए अपने निर्णय लेने होंगे और खुद के समय का प्रबन्‍ध करना सीखना होगा। समय ऐसा धन है, जो हम सभी के पास समान मात्रा में होता है। किसी के पास अधिक लंबा दिन, सप्‍ताह या साल नहीं होता है। कुछ लोग धन की तरह समय को बर्बाद करते हैं जबकि कुछ लोग उस समय का अच्‍छा इस्‍तेंमाल करके  आम से खास आदमी बन जाते हैं।
इस उदाहरण के माध्‍यम से हम देख सकते हैं।

माना हम 05 Day in a Week के अनुसार नौकरी करते हैं।

05 दिन के 24 घन्‍टे के हिसाब से 24 X 5 =120 घन्‍टे होते हैं।

माना हम 5 दिन 8 घन्‍टे नौकरी करते हैं 5 X 8 = 40 घन्‍टे होते हैं।

हर दिन आने-जाने तथा भोजन आदि में 4 घन्‍टे समय लगता है 5 X 4 = 20

हर दिन सोने के लिए 8 घन्‍टे समय लगता है 5 X 4 = 40

घन्‍टे इस प्रकार 40 + 20 + 20 + 40 = 120 घन्‍टे सप्‍ताह में निश्चित होते हैं।

लेकिन हम ये मानते हैं कि 100 की जगह 105 घन्‍टे का समय खर्च होता है तो भी इस गणना के अनुसार हर सप्‍ताह टोटल 120 – 105 =15 घन्‍टे बचते हैं जिन्‍हें हम खली समय से श्रेणी में रख सकते हैं।
अब हमें काम के दिनों के आलावा बाकी दिनों की भी जोड़कर देखना चाहिए जिसमें हमारी संवैधानिक छुट्टियाँ भी शामिल हैं। साल में 52 Sunday हैं और 52  Saturday है। साल में कम से कम 18 Gazette Holiday सरकारी Job या सेना में  हैं तो आपके लिए वार्षिक अवकाश
Casual Leave= 30Days
Annual Leave= 60 Days
इसलिए बहुत से लोग जो सरकारी नौकरी या सेना में नौकरी करते हुए मैटि्रक से Double MA, MBA या और बड़ी-2 मास्‍टर डिग्रीयाँ प्राप्‍त कर लेते हैं और योग्‍यता बढ़ा लेते हैं। यह बात अलग है कि उन्‍हे नौकरी में रहते हुए उनका कोई खास फायदा नहीं होता है लेकिन रिटायरमेन्‍ट के बाद तो उसका प्रयोग तो होता ही है।
ऐसे ही अगर हम खुद का बॉस बनने की ठान लें और 3 से 5 साल में डायमण्‍ड की डिग्री लेलें तो आने वाली पीढ़ियाँ भी करोड़पति पैदा होगी।



!! इति श्री !!

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